कर्नाटक के तालुक अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट की कमी

आइसीयू और आपातकालीन देखभाल विभाग में इनकी भूमिका अहम है। एक ही एनेस्थेटिस्ट होने के कारण दोनों में से एक विभाग को हमेशा इनका इंतेजार रहता है। नियमानुसार हर तालुक अस्पताल में एक आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी भी होना चाहिए। लेकिन इनकी जिम्मेदारी भी एनेस्थेटिस्टों के कंधों पर ही है।

By: Nikhil Kumar

Published: 17 Sep 2020, 09:30 PM IST

बेंगलूरु. प्रदेश के ज्यादातर तालुक अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट की कमी है। किसी अस्पताल में एक एनेस्थेटिस्ट है तो किसी में एक भी नहीं। आइसीयू और आपातकालीन देखभाल विभाग में इनकी भूमिका अहम है। एक ही एनेस्थेटिस्ट होने के कारण दोनों में से एक विभाग को हमेशा इनका इंतेजार रहता है। नियमानुसार हर तालुक अस्पताल में एक आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी भी होना चाहिए। लेकिन इनकी जिम्मेदारी भी एनेस्थेटिस्टों के कंधों पर ही है।

प्रदेश सरकारी चिकित्सा अधिकारी संघ (केजीएमओए) के अनुसार उत्तर कर्नाटक के तालुक अस्पताल सर्वाधिक प्रभावित हैं। कोविड आइसीयू प्रबंधन में कई स्तर पर भयंकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केजीएमओए ने रिक्त पदों पर बहाली की मांग की है। तालुक अस्पतालों को दुरुस्त करना बेहद आवश्यक है क्योंकि प्रदेश में कोविड के करीब 25 फीसदी मामले ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आए हैं। ज्यादातर मरीज तालुक अस्पतालों के भरोसे हैं।

केजीएमओए के अध्यक्ष डॉ. जी. ए. श्रीनिवास ने बताया कि समस्या तालुक अस्पतालों तक ही सीमित नहीं है। यादगीर, गदग और कोप्पल जैसे जिलों के जनरल अस्पतालों में भी एनेस्थेटिस्टों की कमी है।

स्वास्थ्य आयुक्त पंकज कुमार पांडे ने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। विभाग ने 10 सितंबर को आवेदन आमंत्रित किया है। मेडिकल स्नातकोत्तर के 900 से ज्यादा विद्यार्थी एक वर्षीय अनिवार्य सेवा के तहत जल्द ही ड्यूटी पर होंगे।

Nikhil Kumar Reporting
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