कावेरी बोर्ड के गठन को शीर्ष अदातल में चुनौती देगा कर्नाटक

कावेरी बोर्ड के गठन को शीर्ष अदातल में चुनौती देगा कर्नाटक

Kumar Jeevendra | Updated: 30 Jun 2018, 07:24:51 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

संसद में भी मसला उठाएंगे सांसद
सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

बेंगलूरु. दक्षिण के दो पड़ोसी राज्यों-कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी जल बंटवारे का मामला एक बार फिर से शीर्ष अदालत के पास पहुंचेगा। राज्य सरकार कावेरी बोर्ड के गठन संबंधी केंद्र सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। साथ ही राज्य के सांसद संसद के मानसून सत्र में भी इस मसले को उठाएंगे। हालांकि, पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल विनियमन समिति के लिए अपने प्रतिनिधियों को नामित कर दिया था।

शनिवार को विधानसौधा सभागार में करीब दो घंटे तक मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के बिना राज्य को विश्वास में लिए कावेरी बोर्ड गठित करने के फैसले पर कानूनी और संसदीय लड़ाई लडऩे का फैसला लिया गया।
राज्य सरकार केंद्र की अधिसूचना को शीर्ष अदालत में चुनौती देगी, जबकि राज्य के 40 सांसद (28 लोकसभा व 12 राज्यसभा) संसद के दोनों सदनों में इस मसले को उठाएंगे और बहस कराने की मांग करेंगे। बैठक में आम सहमति बनी कि शीर्ष अदालत के आदेश पर बोर्ड और समिति के गठन से पहले इस मसले पर केंद्र सरकार को संसद मेें बहस करानी चाहिए थी, लेकिन संसद में बहस नहीं होने के कारण सांसदों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला।

बैठक के बाद कुमारस्वामी ने कहा कि इस बारे सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया और राज्य सरकार इस बारे में कानूनी लड़ाई लड़ेगी। हमने इस मसले पर वकीलों की टीम के साथ चर्चा की है और सांसदों की राय भी ली है। राज्य सरकार ने एकजुटता से इस मसले पर संघर्ष करने और अदालत में केंद्र की अधिसूचना को चुनौती देने का निर्णय लिया है।

कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य ने हमेशा संवैधानिक फैसलों का पालन किया है। हम उच्चतम न्यायालय और उसके निर्देशों का सम्मान करते हैं, लेकिन दो-तीन मसले हैं जिन्हें काफी अवैज्ञानिक तरीके से सुलझाने की कोशिश की गई है और हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येड्डियूरप्पा ने कहा कि भाजपा इस मसले पर राज्य सरकार के साथ है।

बैठक के बाद येड्डियूरप्पा ने कहा कि हम संसद में एकजुट होकर राज्य के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाएंगे। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री एचएन अनंत कुमार ने भी सुझाव दिया कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे को उठाया जाना चाहिए। साथ ही भाजपा ने सरकार को सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो जल विभाजन योजना और कावेरी बोर्ड व समिति के गठन को अदालत में चुनौती दी जाए।

बैठक के बाद जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने काफी जल्दीबाजी में बोर्ड और समिति के गठन का निर्णय लिया। साथ ही राज्य की आपत्तियों का निराकरण भी नहीं किया गया। कानून के मुताबिक ऐसे बोर्ड के गठन से पहले संसद में चर्चा आवश्यक है, लेकिन केंद्र ने चर्चा कराए बिना ही अधिसूचना जारी कर दी। शिवकुमार ने कहा कि अनंत कुमार और केंद्रीय सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने संसद के अगले सत्र में इस मामले में बहस कराने का भरोसा दिया है। शिवकुमार ने कहा कि राज्य के अधिवक्ता फाली एस नरीमन और राज्य के महाधिवक्ता से विचार-विमर्श के बाद याचिका दायर करने के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

 

सिद्धू नहीं आए
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और कांगे्रस विधायक दल के नेता सिद्धरामय्या की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। सिद्धरामय्या जद-एस और कांग्रेस गठबंधन समन्वय समिति के भी अध्यक्ष हैं। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि सिद्धरामय्या ने शुक्रवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण बैठक में अनुपस्थित रहने की जानकारी दे दी थी। सिद्धरामय्या के बेटे और वरुणा से पहली बार विधायक चुने गए डॉ. यतींद्र बैठक में शामिल हुए।

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एम वीरप्पा मोइली, जगदीश शेट्टर के अलावा उप मुख्यमंत्री डॉ. परमेश्वर, प्राथमिक शिक्षा मंत्री एन. महेश, लोकनिर्माण मंत्री एच.डी. रेवण्णा, परिवहन मंत्री डी.सी. तम्मण्णा, लघु सिंचाई मंत्री सी.एस. पुट्टराजू, सांसद डी.के. सुरेश, के.एच. मुनियप्पा, प्रताप सिम्हा, मुद्दहनुमे गौड़ा, राज्यसभा सदस्य के.सी. राममूर्ति, कुपेंद्र रेड्डी, महाधिवक्ता उदय होल्ला आदि उपस्थित थे।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत की ओर अनुमोदित जल बंटवारा कार्य योजना को केंद्र सरकार ने 1 जून को अधिूसचित किया था। इसी के आधार पर 22 जून को केंद्र सरकार ने बोर्ड और समिति का गठन किया था। कर्नाटक के नाम नहीं भेजे जाने के कारण दोनों ही निकायों में राज्य के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया था। हालांकि, केंद्र ने राज्य के दो पदेन अधिकारियों का नाम दे दिया था।

इसके एक दिन बाद राज्य सरकार ने बोर्ड के लिए जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राकेश सिंह और समिति के लिए कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेश एचएन प्रसन्न कुमार को नामित किया था। शिवकुमार ने कहा कि इन दोनों अधिकारियों को इसलिए नामित किया गया ताकि 2 जुलाई को होने वाली दोनों निकायों की बैठक में राज्य का पक्ष रखा जा सके।

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