ट्रांसजेंडर समुदाय : कोरोना से घटी आमदनी, जीना हुआ दुश्वार

  • कर्नाटक : ट्रांसजेंडर समुदाय ने की राहत पैकेज, स्वास्थ्य सुविधाएं और टीके की मांग

By: Nikhil Kumar

Published: 28 May 2021, 10:18 AM IST

बेंगलूरु. शिक्षकों के बाद ट्रांसजेंडर समुदाय (Transgender Community) ने भी कोविड राहत पैकेज की मांग कर सरकार से उन्हें आर्थिक संकट से निकालने की गुहार लगाई है। समुदाय के सदस्यों के अनुसार कोरोना महामारी के बाद से कमर टूट गई है, कमाई से सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और जीना दुश्वार हो गया है। लॉकडाउन के दौरान स्थिति और विकराल हो जाती है। सार्वजनिक स्थानों के बंद होने सहित जन्मदिन व शादी आदि समारोहों के रद्द होने से जान पर बन आई है।

ट्रांसजेंडर समुदाय की सदस्य चंद्रिका ने बताया कि राशन तक खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। लोग कर्ज लेकर काम चला रहे हैं। उम्मीद थी कि सरकार इस बार राहत पैकेज देगी। लेकिन, सरकार ने भी मुंह मोड़ रखा है।

आय का कोई स्रोत नहीं
एक अन्य सदस्य ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार ने ट्रांसजेंडर समुदाय को जीवित रहने के लिए बड़े पैमाने पर भिक्षा और सेक्स वर्क पर निर्भर रहने को मजबूर किया है। शहर में कुछ स्थानों पर ट्रांसजेंडरों को शादी के कायक्रमों और गोद भराई या नवजात शिशुओं को आशीर्वाद देने जैसे कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है। लॉकडाउन के कारण सभी कार्यक्रम रद्द होने से आय का कोई स्रोत नहीं बचा है।

कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा ज्यादा
ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट अक्कई पद्मशाली (Transgender activist Akkai Padmashali) ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी आसान नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर ट्रांसजेंडर इक्वलिटी (एनसीटीइ) की रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसजेंडर्स का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और इसी के चलते इन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा है। इन में से कई लोग एचआइवी-एड्स के भी मरीज हैं। कई को दवा भी उपलब्ध नहीं है। इनके पास भुखमरी काटने के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं बचा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस समुदाय के लिए कुछ नहीं किया है। हालांकि, केंद्र सरकार समुदाय को प्रति व्यक्ति 1500 रुपए प्रदान कर रही है, जो एक महीने तक जीवित रहने के लिए पर्याप्त नहीं है। उम्मीद है कि सरकार जल्द बड़े कदम उठाएगी।

नीति एवं रणनीति बनाते समय रखें ध्यान
पद्मशाली ने कहा, 'हमने अपने अधिकारों की मांग करते हुए बुधवार को उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) का दरवाजा भी खटखटाया है। राज्य सरकार को बजट में कम से कम 20 लाख रुपए समुदाय के लिए अलग रखना चाहिए ताकि हम कम से कम जीवित रह सकें। अस्पताल में जांच कराने जाते हैं तो वहां भी इन्हें कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। सरकार से अपील है कि वह कोरोना वायरस के असर से निपटने के लिए नीतियां एवं रणनीतियां बनाते समय ट्रांसजेंडर समुदाय की चिंताओं पर जरूर गौर करे।'

एआरटी से भी वंचित
कर्नाटक ट्रांसमैन इंटरसेक्स समूह की सह-संस्थानक किरण नायक ने कहा कि समुदाय के कई एचआइवी पॉजिटिव (HIV Positive) सदस्य एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से वंचित हो गए हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के डर से कईयों ने खुद एआरटी (antiretroviral therapy) बंद कर दी है। पॉष्टिक आहर के अभाव में रोग-प्रतिरोधक क्षमता और घट गई है। कोरोना टीकाकरण (Corona Vaccination) सूची में भी प्राथमिकता नहीं मिली है।

कोई भी जरूरमंद भूखा नहीं सोए
बेंगलूरु हुडुगा समूह (Bengaluru Huduga) के सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कर्तव्य ने बताया कि अपनी टीम के साथ वे करीब दो सप्ताह से ट्रांसजेंडर समुदाय की मदद में जुटे हैं। इनकी कमाई के रास्ते बंद हो चुके हैं। सभी परेशान हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय में 300 से भी ज्यादा भोजन किट वितरित किए गए हैं। कोशिश है कि कोई भी जरूरमंद भूखा नहीं सोए। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, ट्रांसजेंडर समुदाय के करीब 4.88 लाख लोग भीख मांगकर, समारोहों में नाच-गाकर और यौन कर्मी बनकर आजीविका कमाने पर मजबूर हैं। लेकिन , महामारी के कारण उनकी आजीविका का यह साधन भी छिन गया और वे पैसा कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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Nikhil Kumar Reporting
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