'कावेरी' ने धोया मन का मैल!

'कावेरी' ने धोया मन का मैल!
bangalore news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 03 2016 11:39:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

कावेरी जल विवाद की गर्माहट में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलने लगी है

बेंगलूरु. कावेरी जल विवाद की गर्माहट में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलने लगी है। पिछले एक दशक से अधिक समय से दोनों दिग्गज नेताओं ने एक-दूसरे को भरी आंख देखा तक नहीं था। मगर कावेरी जल में दोनों के मन के मैल धुलने लगे हैं।


अभी एक महीने पहले तक शायद किसी ने सोचा तक नहीं होगा कि दो धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में इतनी जल्दी इतनी निकटता आएगी। शनिवार को जब देवेगौड़ा कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ धरना देने विधानसौधा परिसर पहुंचे तो मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या अपने आप को नहीं रोक पाए और एक दशक बाद दोनों की निगाहें भरपूर मिलीं। कावेरी बेल्ट के इन दो दिग्गज नेताओं की लंबे समय से नजरें भी नहीं मिली थीं।

कभी देवेगौड़ा सिद्धरामय्या के राजनीतिक गुरु हुआ करते थे। वर्ष 2005 तक सिद्धरामय्या उनके दाहिने हाथ की तरह थे। मगर, कहानी में नया मोड़ तब आया जब सिद्धरामय्या को उपमुख्यमंत्री पद छोडऩे के लिए कहा गया। जनता दल (ध) में जूनियर गौड़ा यानी एचडी कुमारस्वामी को सीढिय़ां चढ़ाने के लिए उठाया गया यह कदम सिद्धरामय्या के राजनीतिक भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं था। लिहाजा सिद्धरामय्या ने कांग्रेस में अपना भविष्य देखा और देवेगौड़ा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन गए। अपनों से लगी चोट ने देवेगौड़ा को इस तरह आहत किया कि सिद्धरामय्या के साथ ताका-ताकी भी बंद हो गई।

लेकिन, वक्त का पहिया जैसे फिर घूम गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार 15 हजार क्यूसेक पानी रोजाना तमिलनाडु को छोडऩे का जब से आदेश दिया तब से सिद्धरामय्या बैकफुट पर हैं। पिछले 12 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट के दूसरे आदेश के बाद भड़की हिंसा में सिद्धरामय्या ही कन्नड़ संगठनों के निशाने पर रहे। कन्नड़ संगठनों का आरोप है कि मुख्यमंत्री राज्य के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं। राज्य सरकार की बार-बार दी गई दलीलों को खारिज करते हुए जब कावेरी निगरानी समिति ने 3 हजार क्यूसेक और फिर सुप्रीम कोर्ट ने 6  हजार क्यूसेक पानी छोडऩे का आदेश दिया तब देवेगौड़ा अपने पुराने शिष्य के पीछे आ खड़े हुए। सिद्धरामय्या के लिए इससे बड़ा समर्थन शायद और नहीं हो सकता। सिद्धरामय्या न सिर्फ देवेगौड़ा के आभारी हुए बल्कि बरसों से सुस्त रिश्ते में गर्माहट आ गई।

सिद्धरामय्या 10 साल देवेगौड़ा से मिलने उनके घर गए तो देवेगौड़ा भी सिद्धरामय्या के विशेष आमंत्रण पर 20 साल बाद 21 सितम्बर को विधानसौधा में आए मुख्यमंत्री की ओर से बुलाए गए सर्वदलीय बैठक में भाग लेने के लिए। हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस बैठक का बहिष्कार किया था लेकिन देवगौड़ा के सरकार के साथ आने के कारण भाजपा को यह दांव उलटा पड़ गया और उसके बाद भाजपा सरकार के साथ दिखने और यह दिखाने की भी कोशिश कर रही है उसे राज्य के हितों की चिंता कांग्रेस से कहीं ज्यादा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देवेगौड़ा के सिद्धरामय्या के साथ आने से न सिर्फ देश के शीर्ष न्यायालय के फैसले का विरोध कर रही राज्य सरकार को मजबूती मिली है बल्कि सिद्धरामय्या ने कांग्रेस आलाकमान को यह संदेश भी दे दिया है कि अगर उन्हें कावेरी मामले को निपटाने में कहीं हुई भूल की सजा मिली तो वे पुराने साथी के साथ मिलकर शह-मात का खेल खेल सकते हैं। वहीं भाजपा इस राजनीतिक खेल में खुद को लाचार पा रही है। वर्ष 2018  के चुनावों में वापसी का सपना देख रही भाजपा के लिए विधानसभा के गलियारे में दो धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का मिलना उसे नहीं सुहा रहा है।


कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट का विरोध कर कन्नडिगा संगठनों में अपनी राजनीतिक पूंजी बढ़ाने में लगी दोनों पार्टियां बड़ी चालाकी से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साध रही हैं। देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की बात कह यह सुनिश्चित कर दिया कि अगर प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप से मामला सुलझता भी है तो श्रेय उन्हें जाएगा। इससे कावेरी बेसिन क्षेत्र में देवेगौड़ा की पार्टी जद ध को अपनी सियासी जमीन थोड़ी और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

मोदी ने किया देवेगौड़ा को फोन
बेंगलूरु. पूर्व प्रधानमंत्री व जद (ध) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच.डी.देवेगौड़ा के  कावेरी मसले पर शनिवार को दिन भर भूख हड़ताल पर बैठने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार सुबह देवेगौड़ा के साथ फोन पर बातचीत करके कावेरी समस्या को शीघ्र ही हल करने का भरोसा दिलाया हैं।

राज्य के कावेरी बेसिन में बारिश की कमी से उत्पन्न जल संकट की स्थिति के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश पर निराशा जताते हुए देवेगौड़ा ने शनिवार को विधानसौधा परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा के पास भूख हड़ताल शुरू की जिसे मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्रियों के भरोसा दिलाने पर वापस ले लिया गया।

देवेगौड़ा ने रविवार को यहां महात्मा गांधी व लाल बहादुर शाी की जयंती के मौके पर उनके चित्रों का माल्यार्पण करने के बाद संवाददाताओं को साथ बातचीत में इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि  मोदी ने  फोन कर कुछ समय तक उनसे बातचीत की और उन दोनों ने कावेरी जल मसले पर चर्चा की। हालांकि, उन्होंने बातचीत का अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया। कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच कावेरी पानी को लेकर चल रहे विवाद में प्रधानमंत्री के दखल नहीं करने पर भी देवेगौड़ा ने निराशा जताई और देवेगौड़ा के भूख हड़ताल पर बैठने का एक कारण यह भी था। केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार के धरना स्थल पर पहुंचकर  मोदी के समक्ष यह मसला उठाने का वादा करने पर ही देवेगौड़ा ने बेमियादी अनशन समाप्त किया था।
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned