द्वेष और अप्रीति रखना गहन दूषण-आचार्य महेन्द्रसागर

पार्षद ने किए आचार्य के दर्शन

By: Yogesh Sharma

Published: 06 Oct 2021, 07:36 AM IST

बेंगलूरु. महावीर स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ त्यागराज नगर में विराजित आचार्य महेंद्रसागर सूरी ने कहा कि समग्र आराधनाओं के मंदिर का शिखर यानी सम्यक दृष्टिकोण। हम अपने जीवन में अच्छी आराधना कर रहे हैं, परंतु जो कम आराधना करने वाले जीव हैं या किसी ने हमारे साथ कुछ गलत व्यवहार किया हो उनके प्रति मन में द्वेष रोष अप्रीति रखना यह भी एक गहन दूषण है। जो हमारे अध्यात्म विकास में अवरोध खड़ा करता है। हम कभी-कभी किसी व्यक्ति के गलत स्वभाव या दोषों को देखकर उसके प्रति ऐसी धारणा कायम कर लेते हैं कि वह एकदम बुरा है पर हर वक्त के लिए उसके प्रति ऐसी धारणा रखना गलत होगा। क्योंकि कभी-कभी किसी सज्जन या सद्गुणी व्यक्ति के संपर्क में आकर वह व्यक्ति गुणों में हमसे भी आगे जा सकता है। सार यह है कि अन्य किसी के दोष की ग्रंथियां अपने साथ हुए दुव्र्यवहार की ग्रंथी बांधकर चलने वाला सम्यक दृष्टिकोण का रवैया नहीं अपना सकेगा। शायद अपनी साधना एवं और आराधनाओंं में दृढ़ मनोबली होना आसान है। लेकिन दोष वाले व्यक्ति के लिए गुण दृष्टिवान बनना बहुत ही मुश्किल है। परंतु मन को संताप मुक्त रखने के लिए ऐसी दृष्टि आवश्यक है। क्रोधी विषयसेवी शासन व संतों के निंदक वगैरह व्यक्तियों से दूर रहना ही अच्छा है। प्रसंगवश ऐसे ही व्यक्तियों के संपर्क में भी आ गए तो उसे तीव्र रोष भरा व्यवहार ना हो जाए यह ध्यान रखना है। जरूरत पड़े तो उसकी अन्य विशेषताओं को देखकर उनसे कार्य लेने का तरीका अपनाएं और उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हुए प्रेम पूर्ण व्यवहार करें। त्यागराज नगर के पार्षद मांझी मेयर बीएस सत्यनारायण ने आचार्य महेन्द्र सागर व संतो के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

Yogesh Sharma Reporting
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