सभी से खमत-खामणा करें

सभी से खमत-खामणा करें

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 16 2018 07:05:58 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

उपासक स्वरूपचंद दाती ने भगवान महावीर के 17वें भव से 27वें भव का वर्णन किया

मंड्या. तेरापंथ सभा भवन में शनिवार को संवत्सरी महापर्व पर उपासक पदमचंद आंचलिया ने कहा कि सामायिक शुभ है या अशुभ योग है। दोनों ही नहीं, समय संवर है। उपासक स्वरूपचंद दाती ने भगवान महावीर के 17वें भव से 27वें भव का वर्णन किया। उपासक राजमल बोहरा ने कहा कि संवत्सरी महापर्व के दिन हमें एक-दूसरे से नहीं, सभी प्राणियों व लोगों से खमत-खामणा करनी चाहिए।
इस मौके पर तपस्वियों को पच्चखान करवाया। शाम को संवत्सरी प्रतिक्रमण सामूहिक रूप से किया गया।


मानव जन्म आत्मा से परमात्मा बनने का मौका
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के तत्वावधान में जैनाचार्यविजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि जिस प्रकार पुरुषार्थ द्वारा जमीन में छिपे हुए पानी को बाहर लाया जा सकता है उसी प्रकार पुरुषार्थ द्वारा अपनी आत्मा में छिपे हुए परमात्म स्वरुप को प्रकट किया जा सकता है। यह मानव भव उसी के लिए आत्मा से परमात्मा बनने का सुंदर अवसर है जो कार्य अन्य किसी भी भव में संभव नहीं है वह सिर्फ मानव भव में संभव है। रविवार को सुबह 9 बजे सिद्धि तप एवं विविध तप के तपस्वियों के अनुमोदनार्थ वरघोड़ा निकलेगा।


बारह वर्ष तक चलने वाली पाद पूजा का शुभारंभ
श्रवणबेलगोला. श्रवणबेलगोला महामस्तकाभिषेक 2018 का समापन चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी के नेतृत्व एवं वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर एवं 125 से भी अधिक साधु-संतों के सान्निध्य में हुआ। 12 वर्षों के बाद होने वाला जैनों का यह महाकुंभ विशालता भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इसके साथ ही प्रभु के पाद पूजा का विधिवत शुभारंभ हो गया।

अब वर्ष-2030 तक भगवान बाहुबली स्वामी की पाद पूजा हर्षोल्लास के साथ की जाएगी। साथ ही अंतिम कलश हल्दी से करके स्वामी ने स्वयं हल्दी से भरे कलश को सभी पर फेंककर अनोखी होली रंगोत्सव का शुभारंभ किया। सभी ने स्वामी सहित सभी साधु संतों को रंंग दिया। गोम्मटेश के आंगन में खेली जाने वाली ये अनोखी होली 12 वर्ष में एक बार ही खेली जाती है, जिसमें प्रमुखता से हल्दी तो होती ही है गुलाल और चन्दन केसर भी होता है। मस्तकाभिषेक के समापन के बाद 12 वर्ष पाद पूजा की जाती है जिसका प्रज्ञासागर मुनि द्वारा विधिवत पंचामृत कलश करके प्रारंभ किया गया।

मुनि ने जल, केसर, अष्टगंध, रक्तचंदन, मलयागिरि चंदन, दुग्ध एवं पुखराज, माणिक आदि रत्नों से पाद अभिषेक किया। साथ ही चांदी के अष्टद्रव्यों से पाद पूजा की। मस्तकाभिषेक समापन होने के बाबजूद भी शनिवार सुबह श्रद्धालुओं की अच्छी खासी उपस्थिति विंध्यगिरी में दिखाई दी।

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