कोरोना से लडऩे के लिए ‘मूंछों पर ताव’ दे रहे राजस्थानी

परोपकार, सेवा, दीन-दुखियों के आंसू पोछने की जो संस्कृति राजस्थानियों की नस-नस में दौड़ती है वह कोरोना वायरस के संक्रमण के समय में भी अपना चोखा रंग दिखा रही है।

बेंगलूरु. परोपकार, सेवा, दीन-दुखियों के आंसू पोछने की जो संस्कृति राजस्थानियों की नस-नस में दौड़ती है वह कोरोना वायरस के संक्रमण के समय में भी अपना चोखा रंग दिखा रही है। लॉकडाउन है तो क्या हुआ, दूसरों को दुखी-परेशान कैसे देख सकते हैं। यही कारण है कि कोरोना से शुरू हुई जंग में राजस्थानी मूल के लोग कहीं भोजन के पैकेट बांट रहे हैं तो कहीं मास्क। इसी जज्बे के साथ कोरोना के खिलाफ मूंछों पर ताव दे रहे राजस्थानी मूल के लोगों ने गुरुवार को भी सेवाभावना का परचम बुलंद रखा।

आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति बेंगलूरु के अध्यक्ष समाजसेवी मूलचंद नाहर ने गुरुवार को बेंगलूरु के अनेक क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन एवं अस्पताल में डॉक्टरों एवं नर्सो को भोजन किट, बेसिक मेडिकल किट, सेनेटाइजर और मास्क वितरित किए। स्थानीय प्रशासन के साथ उनकी टीम ने कई क्षेत्रों में दौरा किया एवं जरूरतमंदों को भोजन भी करवाया।

कामाक्षीपाळया फ्रेंड्स क्लब की ओर से कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को कामाक्षीपाळया पुलिस स्टेशन के निरीक्षक गौतम कुमार को वहां तैनात सभी पुलिस कर्मियों के लिए फेस मास्क भेंट किए गए। इस अवसर पर क्लब के विनीत लोढ़ा, आशीष लोढ़ा, शुभम लोढ़ा, राहुल लोढ़ा, रणजीत गन्ना, महावीर, मुदित जैन, भरत गन्ना, धनराज सीरवी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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Santosh kumar Pandey Desk
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