सरकार मनाएगी टीपू जयंती मगर समारोह से दूर रहेंगे कुमारस्वामी

सरकार मनाएगी टीपू जयंती मगर समारोह से दूर रहेंगे कुमारस्वामी

Kumar Jeevendra | Publish: Nov, 10 2018 01:05:55 AM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

आयोजन आज: आमंत्रण पत्र में सीएम का नाम नहीं, परमेश्वर करेंगे उद्घाटन
तीन दिन के लिए विश्राम करने शहर से बाहर गए मुख्यमंत्री
भाजपा का राज्यव्यापी प्रदर्शन
कोडुगू में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, कई जिलों मेंं निषेधाज्ञा
मंत्री जमीर अहमद मुख्यमंत्री के नहीं आने से नाराज

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी शनिवार को राज्य सरकार की ओर से आयोजित टीपू जयंती के मुख्य कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। कुमारस्वामी शुक्रवार को चिकित्सकों की सलाह तीन दिन विश्राम करने के लिए शहर के बाहर एक रिजार्ट में चले गए। कुमारस्वामी का नाम समारोह के आमंत्रण पत्र में भी नहीं है।
कुमारस्वामी की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता डॉ जी परमेश्वर समारोह का उद्घाटन करेंगे। जयंती समारोह के आयोजन का विरोध कर रहे भाजपा के किसी भी नेता का नाम आमंत्रण पत्र में नहीं है। कुमारस्वामी के समारोह में भाग नहीं लेने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, कांग्रेस और जद-एस के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल नहीं हो पाने के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था और दोनों दलों में टीपू जयंती के आयोजन को लेकर कोई मतभेद नहीं है।
उधर, भाजपा ने शुक्रवार को बेंगलूरु सहित राज्य के विभिन्न जिलों में टीपू जयंती के आयोजन के विरोध में प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए कोडुगू, मण्ड्या, दक्षिण कन्नड़ और चित्रदुर्गा जिले में निषेधाज्ञा लगा दी गई है। हुब्बली-धारवाड़ में भी भारतीय दंड संहिता की धारा १४४ के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। टीपू जयंती के समर्थन अथवा विरोध मेें जुलूस निकालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही टीपू से जुड़े स्थलों पर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। बेंगलूरु के अलावा सभी जिलों में भी सरकारी स्तर पर टीपू जयंती समारोह का आयोजन होगा।
कांग्रेस नेता व खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री जमीर अहमद खान ने कुमारस्वामी के कार्यक्रम में भाग नहीं लेने को लेकर नाराजगी जताई है। सरकार मुख्य कार्यक्रम के स्थल में भी दो बार बदलाव कर चुकी है। पहले विधानसौधा के बैंक्वेट हॉल में आयोजन होना था लेकिन बाद में इसे रवींद्र कला क्षेत्र कर दिया गया। हालांकि, बेंगलूरु के पुलिस के सुरक्षा कारणों का हवाला देने के कारण विधानसौध बैंक्वेट हॉल में ही आयोजन का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि कुमारस्वामी स्वास्थ्य कारणों से समारोह में भाग नहीं लेंगे। कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चिकित्सकों की सलाह पर मुख्यमंत्री ११ नवम्बर (तीन दिन) तक विश्राम करेंगे। इस दौरान कुमारस्वामी परिवार के साथ समय बिताएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री का कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं होगा।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री परिवार के सदस्यों के साथ कबिनी बैक वाटर स्थित एक रिजार्ट में ठहरे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य ठीक है लेकिन उपचुनावों में व्यस्तता के कारण चिकित्सकों ने उन्हें तीन दिन आराम करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री परिवार के सदस्यों के साथ मैसूरु में हैं। कुमारस्वामी की अनुपस्थिति में अब परमेश्वर का मुख्य संबोधन होगा। इसके बाद विधान परिषद के कार्यवाहक सभापति बसवराज होरट्टी की अतिथियों में प्रमुख होंगे। ऐसे में कार्यक्रम सिर्फ कांग्रेस नेताओं तक सिमट कर रह जाने की चर्चा है। उधर, सूत्रों का कहना है कि परमेश्वर भी अंतिम क्षणों में कार्यक्रम से दूर रह सकते हैं। जद-एस नेताओं का कहना है कि गठबंधन धर्म का पालन करते हुए वे टीपू जयंती के आयोजन का विरोध नहीं कर रहे हैं क्योंकि पिछली सरकार के कार्यक्रमों को जारी रखने का निर्णय लिया गया था। इसी कारण पार्टी के मंत्री कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

Tipu jayanti

सभी धर्मों का करें सम्मान : सीएम
उधर, कुमारस्वामी ने टीपू जयंती के आयोजन का विरोध कर संगठनों को चेतावनी दी है कि अगर किसी ने सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन में व्यवधान डालने की कोशिश की तो उससे सख्ती के साथ निपटा जाएगा। कुमारस्वामी ने भाजपा पर राज्य में सौहार्द का माहौल बिगाडऩे की कोशिश करने का आरोप लगता हुए कहा कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। मंगलवार को उपचुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद कहा था कि उन्होंने कभी भी टीपू जयंती के आयोजन का समर्थन या विरोध नहीं किया था। अगर भाजपा को यह अनुचित लगता है तो उन्हें इसमें शामिल नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि १८ वीं सदी में मैसूरु रियासत के शासक रहे टीपू की जयंती मनाने की शुरूआत २०१५ में सिद्धरामय्या के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने किया था। उस वर्ष कोडुगू जिले में हुए प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी।

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