कार्यकाल पूरा होने से ठीक पहले विधायक का निर्वाचन रद्द

गलत जाति प्रमाण पत्र का मामला
उच्च न्यायालय का फैसला

बेंगलूरु. राज्य की 14 वीं विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में महीने भर से भी कम का समय रह गया है लेकिन बुधवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गलत जाति प्रमाण पत्र देने के कारण एक विधायक का चुनाव रद्द कर दिया।
मामला कोलार जिले के मुलबागल विधानसभा क्षेत्र का है। वर्ष 2013 में हुए पिछले चुनाव में यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जी मंजुनाथ जीते थे। यह क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए सुरिक्षत है। ंमंजुनाथ ने इसी वर्ग का जाति प्रमाण भी नामांकन पत्र के साथ पेश किया था। चुनाव के बाद उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे जनता दल (धर्मनिरपेक्ष) के एन. मुनि अंजनप्पा ने मंजुनाथ के नामांकन पत्र को स्वीकारने और निर्वाचन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मुनि अंजनप्पा का आरोप था कि मंजुनाथ ने गलत जाति प्रमाण पत्र पेश किया है।
बुधवार को जस्टिस ए एस बोपण्णा की एकल पीठ ने मुनि अंजनप्पा की याचिका को स्वीकार करते हुए मंजुनाथ के निर्वाचन को रद्द करार दिया। अदालत ने टिप्पणी कि मंजुनाथ का नामांकन पत्र स्वीकारना और चुनाव परिणाम की घोषणा अवैध थी क्योंकि मंजुनाथ ब्यारगी जाति से हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग मेें आता है। मंजुनाथ यह साबित नहीं कर पाए कि वह अनुसूचित जाति में आने वाले बेडा जंगम जाति से हैं। इसके साथ ही अदालत ने मंजुनाथ पर २५ हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने टिप्पणी कि मंजुनाथ को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने से पहले महजर (पंचनाम) की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं की गई और इस बारे में शीर्ष अदालत के निर्देशों की भी अनदेखी की गई।
गौरतलब है कि 5 मई 2013 को हुए विधानसभा चुनाव में मंजुनाथ को 73 हजार 146 मत मिले थे जबकि दूसरे स्थान पर रहे मुनि अंजनप्पा को 39 हजार 142 मत मिले थे।

इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार
मंजुनाथ १२ मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच हुई। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि मंजुनाथ का नामांकन पत्र स्वीकार किया गया है अथवा नहीं।

 

कुमार जीवेन्द्र झा Incharge
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