'कुल देवता करेंगे रक्षा और जंगल देगी दवा'

- कर्नाटक : कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आदिवासी बस्तियां

- जांच व टीके से झिझक रहे समुदाय के लोग

By: Nikhil Kumar

Updated: 11 Jun 2021, 10:42 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना वायरस की गत वर्ष आदिवासी बस्तियों तक पहुंच न के बराबर थी। लेकिन, कोरोना की दूसरी लहर पश्चिमी घाट के आठ जिलों में रह रहे आदिवासियों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है। आदिवासी क्षेत्रों में भी कोरोना का असर देखने को मिल रहा है। समुदाय के 120 से ज्यादा लोगों कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। कुछ लोगों की मौत भी हुई है। इसके बावजूद अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं व विश्वास के कारण ये लोग टीकाकरण नहीं चाहते हैं।

समुदाय के लोगों का कहना है कि वे वनवासी हैं और जंगल के आदि हैं। बीमार पडऩे पर वे दवाओं के लिए जंगलों पर निर्भर रहते हैं। अब, अचानक सरकार लोगों पर टीकाकरण थोप रही है। लोगों की मान्यता है कि उनके कुल देवता उनकी रक्षा करेंगे। उन्हें किसी जांच, दवा या टीके की आवश्यकता नहीं है।

आबादी का लगभग 7 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति कर्नाटक की 6.5 करोड़ आबादी का लगभग 7 प्रतिशत है। आदिवासी समुदायों के एक लाख सदस्य घने जंगल में या इसके आसपास रहते हैं।

चामराजनगर जिले में 30 से ज्यादा सोलिगा आदिवासी कोविड पॉजिटिव निकले हैं जबकि उत्तर कन्नड़ जिले में करीब 20 आदिवासी संक्रमित हुए हैं।

कोडुगू जिले में यरवा और कडू कुरुबा जनजाति समुदाय में भी संक्रमण के चार मामले सामने आए हैं। हसन और चिकमगलूरु के आदिवासी क्षेत्रों में भी करीब 20 मामलों की पुष्टि हुई है। दक्षिण कन्नड़, उडुपी और शिवमोग्गा जिले में करीब 40 मरीज सामने आए हैं।

शहर से लौटे युवा साथ लाए वायरस
सोलिगा आदिवासी सी. मडेगौड़ा ने बताया कि चामराजनगर में समुदाय के 10-15 सदस्य संक्रमण से उबरे हैं जबकि शेष होम आइसोलेशन में हैं। कोरोना की पहली लहर में जनजातीय बस्तियां काफी हद तक अप्रभावित रहीं। लोग शायद ही कभी बाहर निकलते थे। जो लोग पॉजिटिव निकले हैं, वे हाल ही में बाजार गए थे। कुछ मामलों में शहर से काम करके लौटे युवा सदस्यों के कारण संक्रमण फैला।

टीकाकरण को लेकर जागरूक नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। आदिवासी समुदाय के लोग कोरोना टीकाकरण को लेकर जागरूक नहीं है। अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण भी उनमें टीके को लेकर झिझक है। हुण्सूर, एचडी कोटे, सरगूर, नंजनगुड़ तालुक में 219 आदिवासी समुदायों के 12,560 परिवार रहते हैं। इन परिवारों में करीब 60 हजार सदस्य रहते हैं। एचडी कोटे तालुक में 119 समुदाय हैं। यहां करीब 19 हजार लोग रहते हैं। कोविड के तीन पुष्ट मामले सामने आए हैं। कुछ लोगों को बुखार है। लेकिन, लोग टीका नहीं लगवाना चाहते हैं। कई तो कोविड जांच तक से मना कर देते हैं।

मनाना है तो उन्हें जागरूक करना होगा
आदिवासी नेता जेके रामू ने सरकार से समुदाय के लोगों के लिए वित्तीय सहायता व कोविड देखभाल केंद्र स्थापित करने की मांग की है। लोगों को टीकाकरण के लिए मनाना है तो उन्हें जागरूक करना होगा। विश्वास दिलाना होगा कि टीके का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है और टीका पूरी तरह से सुरक्षित है।

जंगलों में भाग जाते हैं
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इन आदिवासी इलाकों में टीकाकरण करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि हमने तो यह भी देखा है कि जब भी कोई सरकारी टीम यहां के गांव में आती हैं तब कई गांव वाले इस डर से जंगलों में भाग जाते हैं कि कहीं उन्हें टीका ना लगा दें।

Nikhil Kumar Reporting
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