scriptLack of character leads to downfall - Acharya Devendrasagar | चरित्र का अभाव पतन की ओर अग्रसर कर देता है-आचार्य देवेंद्रसागर | Patrika News

चरित्र का अभाव पतन की ओर अग्रसर कर देता है-आचार्य देवेंद्रसागर

जयनगर में आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया

बैंगलोर

Published: December 02, 2021 07:13:10 am

बेंगलूरु. जयनगर के राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी का आचार्य पद पदारोहण दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य ने कहा कि विचारों की नींव पर चरित्र रूपी भवन खड़ा होता है। श्रेष्ठ चिंतन एवं सद्गुणों की संपत्ति से चरित्र बल का निर्माण होता है। यही मनुष्य की प्रेरणा का सबल बनता है। परंतु हमारी वर्तमान व्यवस्था आज भी रोटी, कपड़ा और मकान के विकास तक ही सीमित है, केवल भौतिक समृद्धि समाज को शांति के पथ पर नहीं ले जा सकती। समाज में जब तक सात्विक प्रवृत्तियों के माध्यम से चरित्र बल उत्पन्न नहीं होता तब तक सारी भौतिक सुविधाएं व्यर्थ हैं। ऐसी अवस्था समाज को अधोगति की ओर ले जाती है। दृढ़ चरित्र बल का अभाव राष्ट्र को पतन की ओर अग्रसर कर देता है। चरित्र बल मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। चरित्र निर्माण की प्रक्रिया जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है। चरित्र बल ही मानवीय गुणों की मर्यादा है। यह स्वभाव और विचारों की दृढ़ता का ***** है। आत्मशक्ति के विकास, सम्मान एवं वैभव का सोपान चरित्र बल है। चारित्र ज्ञान बिना साधना का कोई मूल्य नहीं होता है। जिस प्रकार सम्यक व्यवहार में अंक बिना शून्य का कोई अर्थ नहीं होता है। चारित्र की आराधना आत्मा का मौलिक गुण होता है। चरित्र शब्द शील-स्वभाव का वाचक है। चरित्र सदाचार का भी वाचक है। सत्पुरुषों जैसे आचार-विचार वाले व्यक्ति को सदाचारी कहते हैं। चरित्र में धर्म, सदाचार एवं सभी सद्गुणों का समावेश हो जाता है। आयुर्वेद में सुंदर स्वास्थ्य के लिए चरित्र की निर्मलता आवश्यक बताई गई है। कहते हैं सच्चरित्र को कभी गंभीर रोग नहीं होता। हो भी जाए, तो शीघ्र मिट जाता है। सुदृढ़ स्वास्थ्य के साथ-साथ धर्म, कर्म, अर्थ और मोक्ष रुपी चारों वर्ग भी चरित्रवान को सरलता से मिल जाते हैं। आयुर्वेद के महर्षियों ने स्वस्थ रहने के लिए सत्चारित्र पालन की आवश्यकता बतलाई है। ईर्षा, भय, क्रोध आदि से साधारण भोजन दूषित हो जाता है। अच्छी संस्कृति और संगति से अच्छे संस्कार बनते हैं। धर्म आचरण युक्त संस्कार ही भावी चरित्र का निर्माण करते हैं। अच्छे चरित्र से मन निर्मल रहता है। एक सच्चरित्रवान् व्यक्ति दूसरों को भी निर्भय एवं निरोगी बनाता है। प्रसंग के तहत कंवली ओढ़ा के व गुरु पाद पूजन करके आचार्य से श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद ग्रहण किया।
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