लैब व डायलिसिसि तकनिशियन भी नहीं, धूल फांक रही मशीनें

- चिकित्सकों व नर्सों की कमी से जूझ रहे कर्नाटक के पीएचसी, तालुक अस्पताल

By: Nikhil Kumar

Published: 09 May 2021, 06:27 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना महामारी ने पहले से ही चिकित्सकों व नर्सों की कमी से जूझ रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) व तालुक अस्पतालों की हालत बदतर कर दी है। देश में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज वाले राज्यों में शुमार कर्नाटक के ज्यादातर अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सों व पैरामेडिकल कर्मचारियों की भारी कमी है। कई अस्पतालों में लैब व डायलिसिस तकनीशियन भी नहीं हैं। नैदानिक मशीनें धूल फांक रही हैं। चिकित्सकों व नर्सों के 25-30 फीसदी पदों पर कई वर्षों से नियुक्ति नहीं हुई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तो 40-50 फीसदी तक कमी है। आर्थिक रूप से कमजोर व सरकारी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

दो से तीन पीएचसी की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार कई पीएचसी न्यूनतम कर्मचारियों से काम चला रहे हैं जबकि कईयों में स्थाई एमबीबीएस चिकित्सक तक की नियुक्ति नहीं हुई है। कई क्षेत्रों में एक ही चिकित्सक व लैब तकनीशियन के सिर पर दो से तीन पीएचसी की जिम्मेदारी है।

तीन की जगह एक नर्स
रायचुर स्थित के पीएचसी के एक चिकित्सक ने बताया कि एक वर्ष से चिकित्सक व नर्सों की कमी है। तीन की जगह एक नर्स है। चार की जगह एक एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफरी) कार्यरत है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिख नियुक्ति की अपील का भी कोई फायदा नहीं हुआ।

17 पीएचसी में से करीब 12 में आयुष चिकित्सक
बेलगावी स्थित पीएचसी के एक चिकित्सक के अनुसार पीएचसी में चिकित्सकों की कमी से निपटने के लिए सरकार बीते कुछ वर्षों से आयुष चिकित्सकों का सहारा ले रही है। यह अस्थाई समाधान सरकार के लिए अब स्थाई बन गई है। बेलगावी जिले के 17 पीएचसी में से करीब 12 में आयुष चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं।

कोविड मरीजों की जांच व उपचार में देरी
बेलगावी के ही एक पीएचसी में कार्यरत तकनीशियन ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण पीएचसी, जिला व तालुक अस्पतालों पर भारी दबाव है। कोविड मरीजों की जांच व उपचार में देरी हो रही है। एक मरीज ने 16 अप्रेल को आरटी-पीसीआर जांच कराई। रिपोर्ट पांच मई को मिली। ऐसे में मानव संसाधन की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है। पीएचसी की हालत सबसे खराब है।

मशीनें चलाने वाला कोई नहीं
कल्याण कर्नाटक विकास बोर्ड ने फंड जारी कर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के कई तालुक और जिला अस्पतालों का कायाकल्प किया। उपचार सुविधाएं व नैदानिक मशीनें उपलब्ध कराईं। इनमें डायलिसिस मशीनें भी शामिल हैं। कई अस्पतालों में वेंटिलेटर भी लगे। लेकिन, चिकित्सकों व तकनीशियन्स की नियुक्ति नहीं हुई। मशीनें चलाने वाला कोई नहीं है।

चिकित्सकों की मानें तो ग्रामीण कर्नाटक में विशेषज्ञ चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से कई कोविड मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।

Show More
Nikhil Kumar Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned