दिल की धड़कने बढ़ाने वाली है कोरोना चिकित्सा शुल्क की सूची

नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या बोले

By: Sanjay Kulkarni

Published: 24 Jun 2020, 05:26 PM IST

बेंगलूरु. राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के शुल्क की जो सूची जारी की गई है, वह दिल की धड़कने बढ़ाने वाली है। इससे राज्य सरकार की संवेदनहीनता उजागर हो रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या ने यह बात कही।उन्होंने मंगलवार को कई ट्वीट करते हुए कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट करना होगा की आम आदमी के लिए इतनी महंगी चिकित्सा कैसे संभव है। केंद्र तथा राज्य सरकार अपना दायित्व निभाने में विफल रही है।

जब कोरोना वायरस का संक्रमण अनियंत्रित हो गया है ऐसी आपात स्थिति में लोगों को अब निजी क्षेत्र में चिकित्सा के लिए मजबूर किया जा रहा है। स्पष्ट है कि सरकार समाज के गरीब तबके के लोगों के प्रति कोई संवेदना नहीं रखती।उन्होंने कहा कि शुल्क सूची जारी कर राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों की लूट को परोक्ष रूप से मान्यता प्रदान की है। राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों की सूची को आंखे मूंदकर अनुमति दी है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार निजी अस्पतालों की लॉबी के सामने झुक गई है।

राज्य सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करनी होगी क्या वह रोगी की चिकित्सा चाहती है या निजी अस्पताल के हितों की रक्षा चाहती है?उन्होंने कहा कि इस संक्रामक बीमारी की चिकित्सा सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व है। लेकिन राज्य सरकार अपना दायित्व भूलकर लोगों को निजी क्षेत्र के अस्पतालों के हवाले कर रही है। चिकित्सा के नाम पर लोगों की लूट को रोकने के लिए राज्य सरकार को तुरंत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करना चाहिए।लॉकडाउन के कारण सैकड़ो लोग बेरोजगार हुए हैं। निजी क्षेत्र की औद्योगिक कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को काम से निकाल रही है। लोगों के पास जीवनयापन के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसी स्थिति में ऐसे परिवार के दो चार सदस्यों के कोरोना वायरस की चिकित्सा की हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। लिहाजा राज्य सरकार को मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत इस सूची को वापस लेना चाहिए।

इसके अलावा निजी क्षेत्र के अस्पतालों में चिकित्सा लेनेवालों को स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से दूर रखने की बात कही गई है। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार को निजी क्षेत्र के बीमा कंपनियों का हित कितने मायने रखता है।उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए चिन्हित सरकारी अस्पतालों में रोगियों के लिए बेड उपलब्ध नहीं है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 35 हजार वेंटिलेटर्स की मांग रखी थी लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक केवल 90 वेंटिलेटर्स उपलब्ध कराए है। साफ है कि राज्य सरकार राज्य के जनता के हितों की रक्षा करने में विफल रही है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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