तेंदुए ने बनाया ढाई साल की बच्ची को शिकार, गोली मारने के आदेश

अब तक चार लोगों की ले चुका है जान

By: Rajeev Mishra

Published: 01 Mar 2020, 07:02 PM IST

बेंगलूरु.
तूमकुरु जिले के हेब्बार तालुक स्थित बैचनहल्ली गांव में तेंदुए ने एक ढाई साल की बच्ची को अपना शिकार बना लिया। घटना तब घटी जब बच्ची रात 8 बजे के लगभग अपने घर के बाहर खेल रही थी। पिछले अक्टूबर महीने से जिले में इस तेंदुए का आतंक है और अभी तक चार लोगों को अपनी शिकार बना चुका है। इस घटना के बाद वन मंत्री ने तेंदुए को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए हैं।
तेंदुए ने जब हमला किया उस वक्त बच्ची के माता-पिता तथा दादा-दादी घर के अंदर थे। जब कुछ देर तक वह घर में नजर नहीं आई तब चिंतित माता-पिता ने उसकी तलाश शुरू की। उसका मृत शरीर रात 10.30 बजे के आसपास घर से लगभग 150 मीटर की दूरी पर मिला। उसके चेहरे और बाहों पर तेंदुए ने काटा था। पुलिस ने बताया कि बच्ची की पहचान चंदना के तौर पर हुई है। उसके पिता का नाम श्रीनिवास और मां का नाम शिल्पा है। घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस अधिकारियों की टीम पहुंची। इस संदर्भ में एक मामला मुकामी थाने में दर्ज कर लिया गया है। ताजा घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि बार-बार वन विभाग से अपील की गई लेकिन, कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
आदमखोर हो चुका है तेंदुआ
इस बीच वन मंत्री आनंद सिंह ने आदमखोर हो चुके तेंदुए को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है। घटना के बाद बैचनहल्ली पहुंचे वनमंत्री ने कहा कि तेंदुए को पकडऩे की कार्यवाही सोमवार से शुरू होगी। तेंदुए ने बच्ची को शनिवार रात पकड़ा और उसे मार डाला। इस घटना के बाद गांव के लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। उन्होंने पीडि़त परिवार को सांत्वना दी और मुआवजा देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा वन अधिकारियों को इस घटना को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया।
दहशत में ग्रामीण
दरअसल, चंदना इस आदमखोर तेंदुए की चौथी शिकार बनी। कुप्पे गांव के 60 वर्षीय लक्ष्मणम्मा तेंदुए का पहला शिकार बने थे। वह घटना 17 अक्टूबर 2019 को घटी थी। इसके बाद 29 नवम्बर 2019 को दोड्डामारलवाड़ी का एक 60 वर्षीय चरवाहा आनंदय्या दूसरा शिकार बना। पिछले 9 जनवरी 2020 को इस तेंदुए ने मणिकुप्पे गांव के एक पांच साल के बच्चे समर्थ गौड़ा को अपना तीसरा शिकार बनाया। एक ग्रामीण ने कहा कि तेंदुए के हमले को देखते हुए दिन में भी वे अपने खेतों में जाने से डरते हैं। अंधेरा होने से पहले ही गांव में सभी अपने-अपने घरों में दुबक जाते हैं। पिछले चार महीने में इस आदमखोर तेंदुए ने चार लोगों की जानें ले ली है। वन विभाग से बार-बार अपील की गई लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। यहां तक की जाल लगाने के लिए बार-बार आग्रह किया लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
बच्चे और बूढ़े को बनाता है शिकार
हालांकि, एक वन विभाग के अधिकारी ने कहा कि तेंदुए को पकडऩे की कोशिश हुई है। एचडी चिक्कमारलवाड़ी, दोड्डामारलवाड़ी और मणिकुप्पे में लगभग 20 जाल लगाए गए जहां यह तेंदुआ अक्सर घूमता है। यह बच्चे और बूढ़ों पर अक्सर हमला करता है जो प्रतिरोध नहीं कर सकते। हालांकि, यह एक तरह से वन क्षेत्रों में अतिक्रमण है। लोगों ने जानवरों के इलाके में अतिक्रमण किया है और अब वे हमले की शिकायत कर रहे हैं। पहले भी ऐसे कई तेंदुए पकड़े गए। जनवरी 2018 में भी एक तेंदुआ पकड़ा गया था और उसे बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।

Rajeev Mishra Reporting
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