राज्य में किसानों को बरसात का इंतजार

  • सामान्य से लगभग 47 प्रतिशत कम बरसात

By: Santosh kumar Pandey

Published: 21 Aug 2021, 05:11 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक के बड़े हिस्से में जून और जुलाई में अधिक बारिश होने के बाद जहां किसानों के चेहरे खुशी से चमक उठे थे वहीं अगस्त माह में शुष्क मौसम के कारण किसान परेशान होने लगे हैं। यदि शीघ्र ही बरसात नहीं हुई तो खरीफ सीजन की फसल और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है, जिससे महामारी और मौसम के उतार-चढ़ाव से प्रभावित किसानों की परेशानी और बढ़ जाएगी।

हालांकि जिन क्षेत्रों में भारी बारिश हुई हैं उनमें 83 तालुकों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है। लेकिन राज्य में बरसात की समग्र स्थिति चिंता पैदा कर रही है। मौसम विभाग के अनुसार कर्नाटक में अगस्त में सामान्य से लगभग 47प्रतिशत कम बारिश हुई है। एक सामान्य मानसून में 1 अगस्त से 18 अगस्त के बीच 144 मिमी बारिश होने की उम्मीद रहती है लेकिन इस बार, राज्य में केवल 77 मिमी ही बरसात हुई है।

उत्तर आंतरिक कर्नाटक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है जहां 51 प्रतिशत कम बारिश हुई है जबकि मलनाडु इलाके में 50 प्रतिशत व तटीय जिलों में 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक की हालत तुलनात्मक रूप से बेहत है जहां महज 25 फीसदी कम बारिश हुई है।

तत्काल बारिश की जरूरत

गांधी कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि मौसम विज्ञानी एच एस शिवरामु ने कहा कि सूखा मौसम ऐसे समय पर आया है जब फसलें अंकुरित होने के चरण में पहुंच गई हैं। अब बारिश की जरूरत है। यदि शुष्क स्थिति एक सप्ताह या 10 दिनों तक जारी रहती है, तो फसल प्रभावित होगी।

पांच दिनों तक बरसात नहीं

वहीं किसानों के लिए वर्तमान मौसम पूर्वानुमान उत्साहजनक नहीं हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग, बेंगलूरु के निदेशक सीएस पाटिल ने कहा कि अगले पांच दिनों तक बारिश नहीं होगी। लेकिन वह उम्मीद कर रहे हैं कि उसके बाद समुद्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनेगा और बरसात हो सकेगी।
जून में 13 जिलों में आई बाढ़
बता दें कि खरीफ सीजन (जून-अक्टूबर) अच्छी तरह से शुरू हुआ और जून की शुरुआत में बारिश हुई थी। उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में सामान्य से क्रमश: 78 प्रतिशत और 37 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, और 13 जिलों में बाढ़ के हालात बन गए।
कृषि विभाग के निदेशक बीवाई श्रीनिवास ने कहा कि राज्य में शुष्क मौसम आने से पहले बोवाई अच्छी तरह से चल रही थी। हालांकि मंगलवार और बुधवार को राहत मिली क्योंकि बीदर सहित कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश हुई। लेकिन हमें अधिक वर्षा की आवश्यकता है।
पिछले साल 77 लाख हेक्टेयर में रिकॉर्ड बुवाई हुई थी। इस साल रकबा 68 हेक्टेयर तक पहुंच गया है और कई हिस्सों में रागी और मूंगफली की बोवाई होनी है। धान जैसी जल-गहन फसलें रोपण चरण में पहुंच गई हैं और उनका अस्तित्व बारिश पर निर्भर करेगा।

पूरी होगी कृषि की जरूरत

कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आयुक्त मनोज राजन परिदृश्य के बारे में आशावादी हैं। वे कहते हैं कि बरसात नहीं होने का संकट बहुत गंभीर नहीं है। जून और जुलाई में अच्छी बारिश के कारण जलाशय लगभग भर चुके हैं। नियमित रूप से पानी छोडऩे से कृषि की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। मुझे नहीं लगता कि चिंता का कोई कारण है।
इस बीच, राज्य सरकार ने 83 तालुकों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया है।

Santosh kumar Pandey Desk
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