मंड्या में मिला लिथियम का भंडार

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम आयन बैटरी का स्रोत
अनुमानत: 14 हजार 100 टन हो सकता है लिथियम का यह भंडार

बेंगलूरु.
राज्य के मंड्या जिले में दुर्लभ धातु लिथियम का भंडार मिला है। भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के अनुसंधान कर्ताओं ने मंड्या में लगभग 14 हजार 100 टन के लिथियम भंडार की खोज की है। मंड्या बेंगलूरु से लगभग 70 किमी की दूरी पर है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिथियम का भंडार मिलने से देश में ई-वाहनों का चलन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) में एमिरेट्स प्रोफेसर एवं बैटरी टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ एन. मुनिचंद्रय्या ने बताया कि 'अब तक प्राप्त जानकारी के आधार पर मांड्या में 0.5 किमी से 5 किलोमीटर तक के दायरे में लगभग 30 हजार 300 टन एलआई-20 उपलब्ध होने का अनुमान है। यह लीथियम धातु के लगभग 14 हजार 100 टन के बराबर है।Ó
लिथियम भंडार मिलने से देश को पर्यावरण हितैषी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। फिलहाल अपनी जरूरतों के लिए भारत अर्जेंटीना, बोलिविया और चीली से लिथियम का आयात करता है। वहीं, भारतीय विनिर्माता चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से लिथियम आयन बैटरी मंगाते हैं। भारत इसका विश्व में सबसे बड़ा आयातक है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान लिथियम का उपयोग बढऩे से इसके आयात में तीन गुणा वृद्धि हुई है। गत वित्तीय वर्ष में भारत ने 1.2 अरब डॉलर का लिथियम बैटरी आयाता किया था। पिछले साल नवंबर तक भारत ने 92.9 करोड़ डॉलर का आयात किया था। वहीं, वर्ष 2017 में भारत ने 38.4 करोड़ डॉलर मूल्य की लिथियम बैटरी का आयात किया था।
हालांकि, भारत में खोजा गया लिथियम का यह भंडार विश्व के अग्रणी लिथियम उत्पादकों के मुकाबले बहुत कम है। चिली 86 लाख टन, ऑस्ट्रेलिया 28 लाख टन, अर्जेंटीना 17 लाख टन और पुर्तगाल में 60 हजार टन के भंडार की तुलना में भारत का यह भंडार 14 हजार 100 टन काफी कम कहा जाएगा। भारत में लिथियम की खोज के लिए ज्यादा कोशिशें भी नहीं हुई हैं। देश में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) लिथियम बैटरी का उत्पादन करता है लेकिन वह अंतरिक्ष अनुप्रयोगों तक ही सीमित है। चीन लिथियम आयन बैटरी के बाजार का अगुवा है। नीति आयोग ने अगले 10 साल में लिथियम आयन बैटरियों के लिए 10 बड़ी फैक्ट्रियां बनाने का लक्ष्य तय किया है। देश में लिथियम मिलने से इलेक्ट्रिक-वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की लागत कम हो सकती है।

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Rajeev Mishra Reporting
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