कोरोना की आड़ में कर्नाटक कैबिनेेट में वर्चस्व की जंग

लॉकडाउन में ढील पर घोषणाएं और यू-टर्न, निर्णय हुए फिर बदले गए

By: Rajeev Mishra

Updated: 23 Apr 2020, 11:32 PM IST

बेंगलूरु.
कोरोना महामारी के चलते एक तरफ जहां राज्य कठिन आर्थिक चुनौतियों का सामाना कर रहा है वहीं, दूसरी ओर 77 वर्षीय मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा के कैबिनेट में छिड़ी वर्चस्व की जंग मुश्किलें बढ़ा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों के बीच जारी सत्ता संघर्ष को लेकर मु यमंत्री खासे नाराज है क्योंकि इसके चलते लॉकडाउन के संदर्भ में पिछले एक सप्ताह में दो बार घोषणाएं करनी पड़ीं।
मंत्रियों के बीच मतभेद का यह सिलसिला कांग्रेस-जद-एस गठबंधन सरकार के बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने और नई सरकार के गठन के समय से ही चला आ रहा है लेकिन, कोरोना महामारी के दौर में यह कई बार खुलकर सामने आ गया। सरकार के मंत्री इन मतभेदों से लगातार इनकार करते रहे हैं लेकिन, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के सबसे सशक्त नेता मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा का संघर्ष स्पष्ट रूप से प्रतीत होने लगा है।


घोषणाएं और उससे मुकरना
कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में कई दफा ऐसा हुआ जब सरकार के मंत्रियों ने एक दूसरे के विपरीत बयान जारी किए और अंतत: येडियूरप्पा को हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन, पिछले 17 अप्रेल से लॉकडाउन में ढील को लेकर एक कशमकश सी चल रही है। एक के बाद एक कई घोषणाएं हुईं और सरकार उनसे मुकरती भी रही। आइटी-बीटी मंत्री का प्रभार संभालने वाले उपमु यमंत्री सीएन अश्वथनारायण ने 17 अप्रेल को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने घोषणा की कि 20 अप्रेल से 50 फीसदी आइटी-बीटी पेशेवर अपने कार्यालय से काम कर सकेंगे। मंत्री ने कहा कि यह अनुमति सामाजिक दूरी कायम रखने, मास्क पहनने, सैनिटाइजर का उपयोग करने और कर्मचारियों को पूरी तरह सैनिटाइज्ड किए गए बसों से ही आने-जाने की कुछ शर्तों के साथ दी जाएगी। लेकिन, उसी शाम मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने यह कहकर कि यह मात्र एक सुझाव है और इसपर अंतिम निर्णय किया जाना बाकी है अश्वथनारायण के घोषणा की हवा निकाल दी। येडियूरप्पा के एक करीबी ने यहां तक कहा कि अश्वथनारायण की यह घोषणा शरारतपूर्ण थी। उन्होंने खुद को श्रेष्ठ साबित करने के लिए यह एकतरफा घोषणा कर दी। इस संदर्भ में कोई भी घोषणा सरकार की ओर से की जानी चाहिए और वह मु यमंत्री येडियूरप्पा द्वारा होनी चाहिए, अश्वथनारायण द्वारा नहीं।


शह-मात का खेल
इसके बाद 18 अप्रेल को येडियूरप्पा प्रशासन ने लॉकडाउन में सीमित राहतों की घोषणा की। इसमें 33 फीसदी आइटी-बीटी कर्मचारियों को कार्यालय से काम करने की अनुमति देने की बात कही गई। साथ ही, निर्माण गतिविधियां शुरू करने और कोविड-19 कंटेनमेंट जोन के बाहर दोपहिया वाहनों के सुचारू आवागमन की भी बात थी। राज्य की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के मद्देनजर यह निर्णय मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा, गृहमंत्री बसवराज बो मई और राजस्व मंत्री आर.अशोक की बैठक में किया गया था। लेकिन, यह निर्णय तुरंत विवादों और आलोचनाओं में घिर गया। कुछ मंत्रियों ने मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा को सलाह दी कि अगर लॉकडाउन में छूट दी गई तो महामारी और विकराल हो जाएगी। एक वरिष्ठ मंत्री ने तो यहां तक कहा कि अगर वे बैठक में होते ऐसा निर्णय होने ही नहीं देते क्योंकि राज्य में कोरोना पॉजिटिव रोगियों की सं या में कोई गिरावट नहीं आ रही है। आनन-फानन में यह निर्णय भी वापस हुआ। मु यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी कर कहा गया कि आइटी-बीटी उद्योगों में कर्मचारियों को कार्यस्थल पर काम करने और दोपहिया वाहनों के सुचारू संचालन पर 20 अप्रेल को निर्णय किया जाएगा। इसके बाद 19 अप्रेल देर शाम एक और आदेश जारी हुआ जिसमें यह कहा गया कि लॉकडाउन का विस्तार 21 अप्रेल तक कर दिया गया है। आगे 20 अप्रेल को कैबिनेट की बैठक में लॉकडाउन 3 मई तक विस्तारित करने अथवा छूट देने पर निर्णय होगा। अंतत: 23 अप्रेल को सरकार ने लॉकडाउन में कुछ रियायतों की घोषणा की।


विरोधाभासी विचार
मु यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले 18 अप्रेल को किए गए निर्णय से मु यमंत्री का पलटना एक 'बुरी सलाहÓ का परिणाम था। राज्य गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। इस महीने के बाद कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त कोष नहीं है। मु यमंत्री ने राजस्व बढ़ाने के लिए निर्णय किया था क्योंकि नगदी संकट काफी गहरा है। हालांकि, विधि मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा कि सरकार के मंत्रियों के बीच कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में इस बात की चिंता जताई गई कि अगर लॉकडाउन में छूट दी गई और लोगों का आवागमन सामान्य हुआ तो इस महामारी को रोकना मुश्किल हो जाएगा। जहां तक राजस्व का सवाल है तो सरकार इस महीने तक उसका प्रबंध कर सकती है। वहीं, मु यमंत्री कार्यालय के अधिकारी ने कहा कि परिवहन से जुड़ी वाणिज्यिक गतिविधियों से सरकार को हर महीने औसतन 12 से 14 हजार करोड़ की आय होती थी जो महज 4 से 5 सौ करोड़ रह गई है। राजकोष खाली हो रहा है और सरकार उसके प्रबंधन को लेकर काफी तनाव में है। लेकिन, मु यमंत्री खुद अपने निर्णय पर अडिग नहीं हो पा रहे। गौरतलब है कि इससे पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री के.सुधाकर और स्वास्थ्य मंत्री बी.श्रीरामुलु के बीच आपसी मतभेद गहराया तो मु यमंत्री बीएस येडियूरप्पा को हस्तक्षेप करना पड़ा और प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस.सुरेश कुमार को जि मेदारी सौंपनी पड़ी।

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Rajeev Mishra Reporting
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