बीएमटीसी को रोजाना हो रहा 88 लाख का घाटा

परिचालन लागत बढ़ी, यात्री संख्या 50 लाख से घटकर 45 लाख के करीब पहुंची

By: Ram Naresh Gautam

Published: 12 Oct 2018, 08:33 PM IST

बेंगलूरु. यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही गिरावट और ईंधन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि की वजह से परिचालन लागत में हुई बढ़ोतरी के कारण बेंगलूरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) को दैनिक 88 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है। पिछले दो महीनों में डीजल की कीमत कई बार बढ़ी है।

वहीं बीएमटीसी ने अपने किराए में लम्बे अरसे से कोई बदलाव नहीं किया है। इसके अतिरिक्त बसों के रखरखाव लागत एवं कर्मचारियों के वेतन आदि का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। इन सभी कारणों से बीएमटीसी को रोजाना बड़े स्तर पर नुकसान झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बीएमटीसी के महाप्रबंधक वी. पोन्नुराज ने कहा कि हम हर महीने प्रति किलोमीटर परिचालन लागत और प्रति किलोमीटर कमाई का आकलन करते हैं। इससे वास्तविक आय एवं व्यय का अंतर पता चलता है। इस आकलन में इस वर्ष अप्रैल और अगस्त के बीच राजस्व में एक बड़ा अंतर देखा गया है।

मौजूदा समय में निगम को वातानुकूलित बसों से 18.31 किमी प्रति घंटे और गैर-वातानुकूलित बसों से 6.31 प्रति किलोमीटर को घाटा हो रहा है। इस प्रकार औसत दैनिक नुकसान 88 लाख रुपए तक पहुंच रहा है। एसी बसें जहां दिन में 1.35 लाख किमी दौड़ती हैं, वहीं सामान्य बसें दिन में करीब 10 लाख किमी तक चलती हैं।

एक अनुमान के मुताबिक बीएमटीसी की दैनिक यात्री संख्या पहले के 50 लाख से घटकर 45 लाख हो गई है। ऐसे में बीएमटीसी को दोहरी मार झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एक ओर उसके समक्ष राजस्व बढ़ाने की चुनौती है तो दूसरी ओर यात्री संख्या बढ़ाने के लिए संघर्ष करना है। जानकारों का मानना है कि बीएमटीसी को यात्री संख्या बढ़ाने के लिए विशेष क्षेत्रों में ध्यान देने की जरुरत है। इसमें उन क्षेत्रों में बस सेवाओं को उन्नत किया जाना चाहिए जहां सर्वाधिक संख्या में यात्री सफर करते हैं। इसी प्रकार रात की सेवाओं को सुदृढ़ करने पर भी ध्यान होना चाहिए ताकि लोग बस की अनुपलब्धता से न जूझें।


सरकारी मदद की दरकार
पिछले हफ्ते, केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन ने एक धरना दिया था, जिसमें बीएमटीसी सहित सभी चार परिवहन निगमों के लिए सरकार से मदद की मांग की गई थी। फेडरेशन का कहना था कि बीएमटीसी बेंगलूरु की जीवनरेखा है। इसी प्रकार अन्य परिवहन निगमों के सहारे रोजाना राज्य के करोड़ों लोग सफर करते हैं। लगातार घाटे की मार झेल रहे बीएमटीसी को अगर सरकार से वित्तीय मदद नहीं मिलेगी तो उसकी आर्थिक स्थिति खस्ता हो जाएगी और परिचालन व्यवस्था ध्वस्त होने का खतरा है। फेडरेशन ने कहा कि सरकार परिवहन निगमों से टिकट राजस्व पर 3 से 5 प्रतिशत तक टैक्स लेती है। निगमों की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

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