पहले कन्नड़ भाषी राज्य था महाराष्ट्र: चिदानंदमूर्ति

उद्धव ठाकरे के बयानों की निंदा

By: Saurabh Tiwari

Published: 03 Jan 2020, 05:40 PM IST

बेंगलूरु. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एम. चिदानंदमूर्ति ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बेलगावी व आसपास के इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करने का बयान देकर अपनी अज्ञानता का परिचय दिया है। उन्होंने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आज का महाराष्ट्र एक हजार साल पहले कन्नड़ भाषी क्षेत्र ही था। महाराष्ट्र के स्वाधीनता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने बेलगावी जिले के गुर्ला होसूर में दिए भाषण में कहा था कि मराठियों व कन्नडिग़ाओं का एक रक्त, एक भाषा है और पूर्व में सारा महाराष्ट्र कर्नाटक ही था। उन्होंने कहा कि कविराज मार्गदा के पदों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि कावेरी से लेकर गोदावरी तक कन्नड़ प्रदेश फैला हुआ था।

उन्होंने कहा कि उत्तर से आए मराठी भाषियों ने 12 वीं सदी के बाद मराठी का प्रचार करके कन्नड़ को पीछे धकेल दिया था। मराठी भाषा का पहला दस्तावेज 12 वीं सदी में मिला था। वहीं कन्नड़ का पहला पत्र 450 ईस्वी का मिलता है। उन्होंने कहा कि मराठी व मराठों का उत्पीडऩ पहले से होता रहा है और अब भी जारी है। अंग्रेजों के जमाने में मुंबई सरकार द्वारा प्रकाशित स्कूली पाठ्य पुस्तकों मे कर्नाटक का 1909 का नक्शा प्रकाशित किया गया था जिसमें बेलगावी भी कर्नाटक का ही हिस्सा था और कोल्हापुर व सोलापुर भी इसमें शामिल थे।मूर्ति ने कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं पर यदि कोई हमारे राज्य के मामले में टांग अड़ाएगा तो हम चुप रहने वाले नहीं हैं। हाल में मुंबई व कोल्हापुर में कन्नड़ ध्वजों को जलाना मूर्खता की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार का बेलगावी को कर्नाटक का अविभाज्य अंग बताने के नजरिए की घोषणा स्वागत योग्य है।

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