पारिवारिक जीवन को भी अहिंसा की प्रयोगशाला बनाइए: मुनि सुधाकर

हनुमंतनगर स्थित तेरापंथ भवन में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 24 Jul 2020, 10:27 AM IST

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर ने हनुमंत नगर स्थित तेरापंथ भवन में प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर ने मानसिक और सामाजिक धरातल पर अहिंसा और समता की प्रतिष्ठा पर बहुत बल दिया है।

कुछ लोगो में यह भ्रान्त धारणा है कि अहिंसा का सम्बन्ध केवल धार्मिक जीवन से है, पर यह उचित नहीं है। पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी अहिंसा और सहजता की प्रयोगशाला बनाना चाहिए। इस दृष्टि से सबके विचारों और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। किसी के अधिकारों का हनन और शोषण करना भी हिंसा है। विचारों के आग्रह के कारण भी वैर-विरोध की वृद्धि हो जाती है। हर व्यक्ति के उचित विचारों का सम्मान करना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि मैं जो सोचता हूं , वही सही है, इस प्रकार के चिंतन से हिंसा बढ़ती है। भगवान महावीर ने जाति अभिमान, कुल का अभिमान, बल का अभिमान, तपस्या का अभिमान, रूप -सुंदरता का अभिमान, सफलता का अभिमान और सत्ता अधिकार का अभिमान, ये आठ प्रकार के अभिमान बताए हैं। अहिंसा और समता की साधना के लिए इन आठ प्रकार के अभिमानों से बचना जरूरी है।

Santosh kumar Pandey Desk
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