मनुष्य जीवन-मरण के बंधन से बंधा है-आचार्य देवेेन्द्र सागर

ऋषिमंडल पूजन व धार्मिक अध्यापक, संगीतकारों का बहुमान

By: Yogesh Sharma

Updated: 15 Apr 2021, 12:16 PM IST

बेंगलूरु. लालबाग रोड स्थित गोड़वाड भवन में मंगलवार को आचार्य देवेंद्रसागर सूरी की निश्रा में फूलचंद करबावाला द्वारा किए हुए सुकृत कार्यों के अनुमोदनार्थ ऋषिमंडल महापूजन का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे प्रारम्भ हुआ ये पूजन दोपहर 2 बजे तक चला। पूजन में नरेंद्र, अशोक, संजय, ने आए हुए आगंतुकों का स्वागत किया। इस अवसर पर बेंगलूरु के धार्मिक अध्यापकों एवं संगीतकारों का बहुमान किया गया। इस अवसर पर आचार्य ने कहा कि परमात्मा भक्ति भाव से करें। भाव से की गई भक्ति ही सफल होती है। इसलिए तप, दान में भी पूर्ण भाव से करे। अनादिकाल से ऋषि-मुनि भी परमात्मा को रिझाने के लिए निस्वार्थ भाव से भक्ति कर पुण्य को अर्जित करते गए हैं। आचार्य ने कहा कि मनुष्य जीवन-मरण के बंधन से बंधा हुआ है। जिससे मुक्त होने के लिए संसार की मोहमाया को त्याग कर आराधना करनी चाहिए। आचार्य ने कहा कि पुण्य और पाप एक सिक्के के दो पहलू हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से पुण्योदय तलवार की धार पर चलने जैसा खतरनाक है। पुण्य उदय में बाह्य जगत की चकाचौंध भरी अनुकूलताएं धन संपत्ति, रूप, रंग, यश, ऐश्वर्य आदि सहजता से प्राप्त होने पर मन का डांवा-डोल होने से रोकना व चित्त को समभाव से स्थिर रखना कठिन है। तब व्यक्ति को वैभव का, कृत्रिम ज्ञान का, विचारों का, पंडिताई का अहंकार हो जाता है और यह मद उसे अशुभ प्रवृत्तियों की ओर खींचता है।
अंत में आचार्य ने कहा कि ये अनुमोदना फूलचंद की नहीं अपितु उनके द्वारा किए हुए सत्कार्यों की अनुमोदना है। सत्कार्य की प्रशंसा मानवी को सत्कार्य करने की प्रेरणा देता है इसी तरह कोई व्यक्ति खराब कार्य कर रहा हो तो उसकी कभी भी प्रशंसा नहीं करना। दुष्कार्य की प्रशंसा मानवी को दुष्कार्य करने की प्रेरणा देता है। पूजन में विधिकारक तुषार गुरू ने बारी बारी से परिवार के सदस्यों से पूजन करवाया। पूजन में आए हुए संगीतकारों ने भी अपनी कला के माध्यम से भक्ति पुष्प अर्पित किए।

Yogesh Sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned