आगे बढऩे की होड़ में इंसानियत को पीछे छोड़ रहा इंसान

धर्मसभा में बोले आचार्य देवेन्द्र सागर

बेंगलूरु. आदिनाथ जैन संघ शांतिनगर में विराजित आचार्य देवेंद्रसागर ने कहा कि इंसानियत यानी मानवता, फिर चाहे वह किसी भी देश का हो, किसी भी जाति का हो या फिर किसी भी शहर का हो सबका एकमात्र प्रथम उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनने का होना चाहिए। हर किसी इंसान के रंग रूप, सूरत, शारीरिक बनावट, रहन-सहन, सोच-विचार और भाषा आदि में समानताएं भी होती हैं और असमानताएं भी होती हैं, लेकिन हम सभी पांच तत्व से बने हैं। हम सभी में परमात्मा का अंश है। आज के इस दौर में इंसान मानवता को छोड़कर, धर्मों के भेद-भाव के रास्ते पर निकल पड़ा है। इसमें कुछ तो हम लोगों की अपनी सोच है और कुछ राजनेताओं द्वारा रचे प्रपंच हंै, जोकि राजनीतिक लाभ में भेद-भाव को बढ़ावा देता है। जिसके चलते एक इंसान किसी दूसरे इंसान की ना तो मजबूरी समझता है और ना ही उसकी मदद ही करता है। उन्होंने कहा कि लोग इंसानियत को छोड़कर धर्मों की बेडिय़ों में जकड़े जा रहे हैं। इंसान धर्म की आड़ में अपने अंदर पल रहे वैर, निंदा, नफरत, अविश्वास, उन्माद और जातिवादी भेदभाव के कारण अभिमान को प्राथमिकता दे रहा है। जिससे उसके भीतर की मानवता शनै- शनै दम तोड़ रही है। इंसान अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और तो और अपने परमपिता परमात्मा को भी भूल गया है। इन सबके चलते मानव के मन में दानवता का वास होता जा रहा है। आज धर्म के नाम पर लोग लहू-लुहान करने से पीछे नहीं हटते जिससे संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। अब इंसान में हैवानियत-सी आ गई है, उसे अपने अलावा किसी की भी कोई अहमियत नजर नहीं आ रही है। यह इसी बात से सिद्ध हो जाता है कि जो इंसान जानवरों और पेड़ पौधों पर भी दया नहीं दिखा सकता वह इंसान पर कैसे कर सकता है? यही वो इंसान है जो अब सिर्फ 'मैंÓ शब्द में ही उलझकर रह गया है और इसी में जीना चाहता है। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर प्रतीत होता है कि 'मरते हैं इंसान भी और अब मर रही हैÓ, इंसानियत। अंत में आचार्य ने कहा कि हम लोगों को अपने संस्कारों को अपनी शिक्षा पर अमल करने की जरूरत है। मैं यह नहीं मानती की कोई भी धर्म या मजहब इंसानियत को मारने के लिए कहता होगा तो क्यों ना हम यह शुरुआत अपने परिवार से करें अपने परिवार को समय देकर उनका हमारे जीवन में महत्त्व को समझें। अगर शुरुआत अपने घर से होगी तभी तो सामाजिक तौर पर इंसानियत को ला पाएंगे।

Yogesh Sharma Reporting
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