मंत्रोच्चार से वातावरण बनता है मंगलमय-मुनि सुधाकर

मंड्या रोड स्थित बदलपुर गांव मेें हुआ बड़ा आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 30 Dec 2020, 05:18 PM IST

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर व मुनि नरेशकुमार विहार कर मंड्या रोड स्थित बदलपुर गांव पहुंचे। जहां श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि ने कहा मंत्र अनुष्ठान के बिना साधना अधूरी है। धार्मिक व्यक्ति को प्रतिदिन ध्यान और जप का अभ्यास करना चाहिए। भगवान महावीर की वाणी में जप को आध्यात्मिक यज्ञ के रूप में प्रतिपादन किया गया है। मंत्र अनुष्ठान से पूर्व संचित क्लेश दूर होता है तथा चित्त शुद्ध बनता है। जप योग से शक्तिशाली कवच का निर्माण होता है। जिससे किसी प्रकार के अनिष्ट का जीवन में प्रवेश नहीं होता है। परिवार की शांति के लिए सामूहिक मंत्र साधना का भी बहुत महत्व है। मंत्रोच्चार से वातावरण मंगलमय, आनंदमय, कल्याणमय बनता है तथा अनिष्ट शक्तियों का दुष्प्रभाव दूर होता है व मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
मुनि सुधाकर ने मंत्र साधना में दिशा विचार पर कहा अलग-अलग साधना एवं मंत्र प्रयोग में अलग-अलग दिशाओं की ओर मुंह करके बैठने का विधान है। अपनी इच्छा से किसी भी दिशा की ओर मुंह करके बैठने से लाभ होने की संभावना कम रहती है। साधक को दिशा ज्ञान भी पूर्ण रूप से होना चाहिए। प्रात: कालीन उपासना अनुष्ठान संकल्प आदि पूर्व दिशा की ओर मुख करके करने चाहिए, संध्याकाल में जो भी अनुष्ठान किया जाए पश्चिमाविमुख होकर करना चाहिए, अलग-अलग मंत्रों में अलग-अलग दिशाओं का निर्धारण मंत्र साधना में विशेष रूप से किया गया है। मुनि ने कहा मंत्र साधना में किस प्रकार का आसन प्रयोग किया जाना चाहिए उसका भी उचित ज्ञान जरूरी है। अलग-अलग आसन के लाभ है कंबल के आसन पर बैठकर जप करने से अनेक प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है, पत्थर के आसन पर जप करने से दुख प्राप्ति की संभावना रहती है।
मुनि ने कहा जिन साधकों को ज्यादा जप करना हो उन्हें मणि की माला का प्रयोग करना चाहिए। मणियों से पिरोही होने के कारण ही यह मणि माला कहलाती है। रुद्राक्ष, तुलसी, कमल, बीज, स्फटिक आदि अनेक पदार्थों की मालाएं सामान्यत: देखी जाती है रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम मानी गई है। मुनि ने मंत्र अनुष्ठान प्रारंभ से पूर्व मुहूर्त की चर्चा करते हुए कहा मंत्र प्रयोग या साधना के लिए पक्ष की दृष्टि से शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की पंचमी तक मंत्र प्रयोग के लिए शुभ माना है। तिथि की दृष्टि से द्वितीय, तृतीय, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और पूर्णिमा शुभ माना है। सोमवार, बुधवार, गुरुवार,शुक्रवार वार की दृष्टि से उपयोगी है। नक्षत्रों मे पुष्य, पुनर्वसु, मघा तीनों उत्तरा, स्वाति एवं रेवती नक्षत्र भी उपयुक्त हैं। इसके साथ-साथ योग करण चौघडिय़ा चंद्रमा का भी विचार कर लेना चाहिए।
मुनि ने कहा मंत्रों से आधी व्याधि व उपाधि से मुक्त होकर समाधि की प्राप्ति होती है। मंत्र साधना से पाप ताप संताप से छुटकारा मिलता है । अशुभ कर्मों का नाश होता है, प्राण शक्ति बलवान बनती है, पारिवारिक शांति मानसिक शांति अनिष्ट के निवारण के लिए मंत्र साधना बहुत उपयोगी है। मंत्रों के प्रभाव से चित चिंतन व चरित्र को भी बदला जा सकता है । मानसिक एकाग्रता से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
मंंड्या सभा मंत्री नरेंद्र दक ने बताया मुनि द्वारा एक जनवरी को मंड्या स्थित तेरापंथ भवन में नव वर्ष का मंगल पाठ सुबह 9:15 बजे से होगा। इसमें मुनिंद मोरा, भक्तांबर स्तोत्र, विघ्न हरण की ढाल, भगवान पाश्र्वनाथ के मंत्रोचार के साथ बड़ी मांगलिक सुनाएंगे। इस अवसर पर मंड्या से किरण भंसाली, जयंतीलाल दक, तेयुप मैसूर से महावीर देरासरिया, मुकेश गुगलिया, सेजल कोठारी, तेयुप हनुमंतनगर से मंत्री धर्मेश कोठारी, विजय कटारिया, प्रकाश दक, परेश बोल्या, भारत चावत व श्रद्धालुओं की उपस्तिथि रही।

Yogesh Sharma Reporting
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