कई निजी स्कूल अपने परिसर में विद्यागम कार्यक्रम शुरू करने के पक्ष में नहीं

  • विद्यागम कार्यक्रम से दूरी बनाने वाले स्कूलों में कई ऐसे स्कूल संचालक हैं जो लंबे समय से स्कूलों को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन विद्यागम कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं।

By: Nikhil Kumar

Published: 18 Dec 2020, 09:52 AM IST

- पूछा बच्चे कोरोना संक्रमित हुए तो किसकी होगी जिम्मेदारी
- जारी रखेंगे ऑनलाइन शिक्षा

बेंगलूरु. शिक्षा विभाग ने जनवरी से नए प्रारूप में ऑफलाइन शिक्षा कार्यक्रम विद्यागम शुरू करने का प्रावधान किया है। सरकारी, अनुदानित और निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जाएगा। लेकिन कई निजी स्कूल संचालक अपने परिसर में विद्यागम कार्यक्रम शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं। पांचवीं तक के बच्चों के लिए तो बिल्कुल ही नहीं। कुछ तैयार भी हैं तो केवल नवीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए। कई अन्य स्कूल संचालकों के अनुसार विद्यागम कार्यक्रम शुरू करने को लेकर वे असमंजस में हैं। विद्यागम कार्यक्रम शुरू होने के बावजूद अभिभावक बच्चों को भेजेंगे या नहीं, स्पष्ट नहीं है।

विद्यागम कार्यक्रम से दूरी बनाने वाले स्कूलों में कई ऐसे स्कूल संचालक हैं जो लंबे समय से स्कूलों को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन विद्यागम कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। बच्चों के संक्रमित होने की दुहाई दे रहे हैं। कई स्कूल संचालकों ने विद्यागम कार्यक्रम के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने सहित जिम्मेदारी तय करने की अपील की है।

स्कूल संचालकों ने पूछा है कि बच्चों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी। तमाम सुरक्षात्मक उपायों के बावजूद बच्चे अगर संक्रमित होते हैं तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्कूल प्रबंधन को ही जि मेदार ठहराया जाएगा।

एक बड़े स्कूल के अध्यक्ष ने कहा कि विद्यागम कार्यक्रम शुरू कर स्कूल प्रबंधन जोखिम नहीं उठाना चाहता है। वैक्सीन आने और बच्चों के टीकाकरण तक इंतजार करना समझदारी है।

एक अन्य प्रतिष्ठित स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों के साथ दो बार बैठक की है। 90 फीसदी से ज्यादा अभिभावक बच्चों को फिलहाल स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। इसलिए ऑनलाइन शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया गया है। नवीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए विद्यागत कार्यक्रम शुरू करने पर विचार करेंगे। इसके लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी।

सरकारी स्कूलों को सूट करता है यह कार्यक्रम : केएएमएस
एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम स्कूल्स इन कर्नाटक (केएएमएस) भी निजी स्कूलों में विद्यागम कार्यक्रम शुरू करने के पक्ष में नहीं है। केएएमएस के महासचिव डी. शशिकुमार ने कहा कि मौजूदा स्थिति में गिनेचुने निजी स्कूल ही विद्यागम कार्यक्रम शुरू कर सकेंगे। परिवहन सबसे बड़ी समस्या होगी। सभी बच्चों के लिए बस सुविधा प्रदान करना स्कूल संचालकों के लिए संभव नहीं है। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या हजारों में है। उन्हें विभिन्न समूहों में कैंसे बांटेंगे। शशिकुमार के अनुसार विद्यागम कार्यक्रम निजी नहीं सरकारी स्कूलों को सूट करता है।

अभ्यस्त हो चुके हैं बच्चे
स्वतंत्र सीबीएइ स्कूल प्रबंधन संघ के सचिव मंसूर अली खान ने बताया कि बेंगलूरु के ज्यादातर स्कूल ऑनलाइन शिक्षा ही जारी रखेंगे। शिक्षक और बच्चे अभ्यस्त हो चुके हैं। मानव संसाधन व अन्य सुविधाओं के अभाव में ज्यादातर स्कूल ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाएं प्रबंधित नहीं कर सकेंगे।

Nikhil Kumar Reporting
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