मर्यादा जीवन विकास की आधारशिला: साध्वी आणिमाश्री

किया मर्यादा-पत्र का वाचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 20 Jul 2020, 05:01 PM IST

बेंगलूरु. साध्वी आणिमाश्री ने गांधीनगर तेरापंथ भवन में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मर्यादा-पत्र का वाचन करते हुए कहा तेरापंथ धर्मसंघ का सुदृढ़ प्रकार है मर्यादा, अनुशासन व व्यवस्था। इसी त्रिवेणी संगम ने तेरापंथ धर्मसंघ में विकास के द्वार उद्घाटित किए हैं।

मर्यादा जीवन विकास की वह आधारशिला है, जो हर लक्ष्य को संपादित करने में योगभूत बनती है। व्यक्ति हो या संगठन, तभी चिरंजीवी और यशस्वी बनते हैं जब उनकी बुनियाद मर्यादा, अनुशासन पर टिकी हो। जिस किसी ने भी मर्यादा को, अनुशासन की जीवन मे अवतरित किया है, वह सदैव आदर्श पुरुष के रूप मे समाज में प्रतिष्ठित हुआ है।

श्रीराम के जीवन का हर पहलू मर्यादा और अनुशासन से अवगुंठित हो रहा है। एक बेटा अपने पिता के वचनों का मान रखने के लिए वनवास तक को सहर्ष स्वीकार कर लेता है। आज तो चिराग लेकर ढूंढने की आवश्यकता है कि ऐसा सपूत बेटा अभी कोई है क्या? एक पत्नी अपने पति के पदचिन्हों का अनुसरण करती हुई वनगमन करती है। लक्ष्मण अपने बड़े भ्राता के साथ वनवासी जीवन स्वीकार कर लेते हैं।

जरा सोचिए, राम को तो पिता की आज्ञा का पालन करना था, लेकिन लक्ष्मण के सामने तो ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं थी फिर भी भातृत्व की रज्जू से आबद्ध वह तन की छाया बनकर हर पल भाई की सेवा करता है। एक ऐसा ही भाई था, जिसने राजमहल में रहकर भी अपने ज्येष्ठ भ्राता के दुखों का स्मरण करके महल में भी वनवासी जीवन जिया। राम की मर्यादा, सीता, लक्ष्मण व भरत की कर्तव्य निष्ठा ने उन्हें अमर बना दिया।

जब व्यक्ति के भीतर कर्तव्यनिष्ठा की लौ प्रज्वलित होती है तो मर्यादा स्वयं ही प्रकाश दीप बनकर उसके समग्र जीवन पथ को आलोकित कर देती है। मर्यादा के परकोटे में रहने वाला व्यक्ति अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है। तेरापंथ धर्मसंघ की आन-बान-शान है मर्यादा। मर्यादा में रहकर जीवन को आंनदमय बनाएं।

Santosh kumar Pandey Desk
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