scriptMeaning of the temple - a place away from the mind - Acharya Devendras | मंदिर का अर्थ-मन से दूर कोई स्थान-आचार्य देवेन्द्रसागर | Patrika News

मंदिर का अर्थ-मन से दूर कोई स्थान-आचार्य देवेन्द्रसागर

25 वां वार्षिक ध्वजारोहण

बैंगलोर

Published: May 12, 2022 07:46:01 am

मैसूरु. इटकेगुड़ कुंथुनाथ जैन मंदिर की 25 वीं वार्षिक ध्वजारोहण निमित्त आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन सुबह आचार्य देवेंद्रसागर सूरी व मुनि महापद्मसागर की निश्रा में नवग्रह पाटला पूजन, दस दिग्पाल पाटला पूजन एवं अष्ट मंगल पाटला पूजन विधिविधान के साथ हुआ। महोत्सव के निमित्त कुंथुनाथ मंदिर को आकर्षक लाइटों से सजाया गया। परमात्मा की मूर्ति को विशेष फूलों से अंगरचना की गई। शाम को सुमतिनाथ जैन मण्डल के युवकों द्वारा परमात्मा की भक्ति की गई। आचार्य ने प्रसंगोचित अपने प्रवचन में मंदिर जाने के फायदे के ऊपर कहा कि अक्सर देखा गया है कि लोग रोजाना मंदिर जाना पसंद करते हैं। कुछ अपने मन को शांत करने के लिए तो कुछ भगवान की पूजा करने के लिए जाते हैं। बता दें कि मंदिर का अर्थ होता है-मन से दूर कोई स्थान। ऐसे में कुछ देर आंख बंद कर मौन रखना बेहद लाभदायक होता है। लोग मंदिर के पीछे छिपे विज्ञान और आध्यात्म को नहीं जानते हैं। सुबह-सुबह मंदिर जाने से कई लाभ होते हैं। व्यस्त जीवनशैली की वजह से लोग मंदिर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में लोगों ने अपने घर के अंदर ही एक छोटा-सा मंदिर बना लिया है। ज्यादातर लोग भगवान को याद करने के अलावा पूजा पाठ भी अपनी इसी छोटे से मंदिर में करते हैं। घरों में मंदिर होना बेहद शुभ है, इससे आप सकारात्मक उर्जा से भरे रहेंगे। मंदिर से सिर्फ आध्यात्मिक लाभ ही नहीं बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायक है। मंदिर में कई चमत्कारी गुण मौजूद हैं। आज कल ज्यादातर लोग तनाव से ग्रसित हैं। ऐसे में मंदिर तनाव को बेहद आसानी से दूर करता है। जब भी हम मंदिर जाते हैं हमारे मन के अंदर एक नई ऊर्जा का एहसास होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर की पवित्रता हमें प्रभावित करती है। मंदिर अपने अंदर और बाहर मौजूद शुद्धता से लोगों को प्ररेणा मिलती है। यही नहीं मंदिर में बजने वाले शंख, घंटी आदि से वहां का वातावरण शुद्ध हो जाता है। कई बार लोग अपनी लाइफ में परेशानियों से इस कदर परेशान हो जाते हैं अकेले रहने लगते हैं। उन्हें लगता है कि अब कोई नहीं है जो उन्हें देख रहा है। ऐसे में मंदिर एक साधन है जहां इस विश्वास का पुनर्मिलन होता है कि भगवान आपको देख रहा है, आपकी बात सुन रहा है। इस तरह आप कभी भी खुद को अकेला महसूस नहीं करेंगे।
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