मन तो स्वाद के नशे में मस्त बना है

श्रीरंगपट्टण में धर्मसभा

By: Yogesh Sharma

Published: 10 Sep 2020, 07:55 PM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता अपने ठाणे के साथ विराजित हैं। गुरुवार को आयोजित धर्मसभा में साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा के बिना कोट, दरवाजे और बिना पहरे वाले नगर पर सदा दुश्मन का भय रहता है। वैसे ही खुले खेत में खड़ी फसल पशुओं के खाने का डर रहता है। गलियों में घूमने वाले पशु जैसे लकड़ी की मार सहन करते हैं। वैसे ही खुले में रखे जेवरात, अलमारी, तिजोरी में रखकर ताला न लगाओ तो चोर लुटेरों के ले जाने का डर रहता है। वैसे ही इन्द्रियों पर लगाम नहीं लगाने से मनुष्य कर्मसत्ता के हाथ लुटता ही रहा है। दु:खी होता ही रहा है। परेशान होता ही रहा है। कहते हैं कि पानी को बहाव या कटाव मिल जाए तो पानी टिकता नहीं बहने लगता है ठीक वैसे ही कुछ प्रलोभन लालच मिला तो इंसान पतन की खाई में गिरने के लिए भी तत्पर हो जाता है। लेकिन सही बात तो यह है कि अगर कान को सुनने से मन न भरा होता तो इंसान विलासी गीतों के श्रवण से नहीं अटका होता। जीभ को खाने से अगर अरुचि नहीं हुई होती तो मिष्ठान्न एवं मसालेदार भोजन से विरक्त नहीं बना होता। अगर आंखें शर्मित नहीं हुई होती तो विजातियों के रूप दर्शन में पागल बन चुका होता। अगर शरीर की इन्द्रियों में शिथिलता नहीं आई होती तो काम वासना से कभी संतुष्टि नहीं होती। इन्द्रियों ने भले ही थकान महसूस कर ली है परन्तु मन अभी भरा नहीं। मन तो स्वाद के नशे में मस्त बना है। अपना अस्तित्व और मान भूल गया है। शील और सदाचार की महिमा जानते हुए भी अनजान बन बैठा है।
आदिनाथ के दरबार में उनकी स्तुति श्रद्धा भक्ति के साथ कि गई। समिति के कार्याध्यक्ष मानमल दरला ने बताया कि अनुष्ठान के लाभार्थी शांतिबाई एवं पन्नालाल की पुण्य स्मृति में एम.एम क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड मैसूरु और पिस्ताबाई बगतावरमल की स्मृति में अशोककुमार प्रकाशकुमार, मनोहरलाल सुरेशचंद, मुकेशकुमार, श्रवण बाफना सुकालपेठ बेंगलूरु रहे।

Yogesh Sharma Reporting
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