ऑटो चालक से बदला लेने के लिए बंदर पहुंचा 22 किलोमीटर दूर

  • वन विभाग ने दोबारा पकड़ जंगल में छोड़ा
  • ऑटो चालक व गांव वालों को सता रहा है बंदर के लौटने का डर

By: MAGAN DARMOLA

Published: 25 Sep 2021, 06:55 PM IST

चिकमगलूरु. जिले का कोट्टीगेहारा गांव एक बंदर के बदले को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। उसे पकडऩे में अहम भूमिका निभाने वाले एक ऑटो चालक से बदला लेने बंदर करीब 22 किलोमीटर का सफर तय कर गांव वापस लौटा। वन विभाग ने उसे दोबारा पकड़ा और इस बार गांव से काफी दूर छोड़ दिया। ऑटो चालक व गांव वालों को अभी भी बंदर के लौटने का डर सता रहा है।

बोनट मैकाक प्रजाति का एक पांच वर्षीय बंदर कोट्टीगेहारा के आसपास घूम रहा था और हर समय लोगों से फल और नाश्ते के पैकेट छीन रहा था। लोगों ने ज्यादा चिंता नहीं की क्योंकि यह किसी भी बंदर की सामान्य प्रकृति है और जब उन्होंने उसे देखा तो सतर्क थे। एक बार जब स्कूल फिर से खुल गए, तो यह बंदर इलाके के मोरारजी देसाई स्कूल के आसपास मंडरा रहा था और बच्चे उससे डरते थे। किसी ने वन विभाग से शिकायत की तो शरारती बंदर को पकडऩे के लिए टीम आई। बंदर को पकडऩे के लिए वन विभाग की टीम ने स्थानीय ऑटो चालकों का सहारा लिया। उसे एक दिशा में फंसा कर पकडऩा चाहते थे।

मदद के लिए साथ गए ऑटो चालक जगदीश ने बंदर को एक दिशा में मोडऩे के लिए चिढ़ाया। व्यथित बंदर अचानक उसकी ओर बढ़ा और उस पर हमला कर दिया। इसने उसके हाथ को काफी जोर से काट लिया। डरा हुआ जगदीश मौके से भाग गया। वह जहां भी गया बंदर ने उसका पीछा किया। वह अपने ऑटो रिक्शा के अंदर छिप गया लेकिन बंदर ने वाहन पर हमला किया और कवरिंग शीट को फाड़ दिया। तीन घंटे की मशक्कत के बाद बंदर पकड़ में आया।

ऑटो चालक जहां जाता, बंदर भी पहुंच जाता

वन विभाग की टीम ने उसे गांव से करीब 22 किलोमीटर दूर बलूर के जंगलों में छोड़ दिया। लेकिन गांव में एक सप्ताह की शांति के बाद बंदर लौट आया। जगदीश जहां भी जाता बंदर उसका पीछा करता। जगदीश काफी घबरा गया और वन विभाग को बंदर के लौट आने की सूचना दी। मुदिगेरे के रेंज वन अधिकारी मोहन कुमार बी. जी. ने कहा 'हम वास्तव में नहीं जानते कि बंदर ने एक आदमी को क्यों निशाना बनाया। हमें नहीं पता कि उसने पहले जानवर को कोई नुकसान पहुंचाया था या यह सिर्फ एक तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। लेकिन यह पहली बार है जब हमने किसी बंदर को इस तरह का व्यवहार करते देखा है। हालांकि बंदरों का इंसानों पर हमला करना अनसुना नहीं है।

जगदीश ने बताया कि वन विभाग ने बंदर को बुधवार को दोबारा पकड़ा और इस बार उसे जंगल के काफी भीतर छोड़ा है। यह वही बंदर है क्योंकि पिछली बार सभी ने उसके कान पर एक निशान देखा था। बंदर को लेकर वे चिंतित हैं। उसके दोबारा लौटने की आशंका बनी हुई है। सुरक्षा कारणों से उन्होंने कुछ दिन घर में ही रहने का फैसला किया है।

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