मानसून तुम कहां हो

  • सूखे जलाशय, चटकती जमीन
  • मानसून में देरी से जलाशयों के भरने की संभावना कम
  • असाधारण देरी ने बढ़ाई चिंता

By: Santosh kumar Pandey

Published: 23 Jun 2019, 07:26 PM IST

बेंगलूरु. मानसून की बेरुखी एक बार फिर राज्य की परेशानी का सबब बन गई है। जलाशय सूख गए हैं, खेतों की जमीन में दरारें पड़ गई हैं। आसमान में घुमड़ते बादल तरसा कर निकले जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगमन में यह असाधारण देर है। पहले से ही राज्य के जलाशयों में पानी रसातल में है। अब मानसून की देरी से इनके भरने की संभावना कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मानसून में और देर नहीं हुई और अच्छी बारिश होती है तो अगस्त या सितंबर तक जलाशय भरने की संभावना रहेगी। इनमें से भी कृष्णराज सागर (KRS) सहित कुछ जलाशय पूरी तरह नहीं भर पाएंगे।

मानसून केरल में हर साल 1 जून को दस्तक देता है और यह कुछ ही दिन बाद राज्य में प्रवेश कर जाता है। लेकिन, इस साल एक तो यह सात दिन विलंब से आया और अभी भी पूरी तरह राज्य में नहीं पहुंच पाया है। यह असाधारण देरी है। अमूमन केआरएस अगस्त महीने तक लबालब भर जाता है लेकिन अभी भी इस जलाशय का जलस्तर काफी नीचे है। इसकी अधिकतम भंडारण क्षमता 49.45 टीएमसी फीट है जबकि इसमें 6 .36 टीएमसी पानी बचा हुआ है। पिछले साल इसी समय इस जलाशय में 21.41 टीएमसी पानी था। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी बारिश हुई तो अब इस जलाशय के अगस्त के अंत तक या सितम्बर के पहले सप्ताह तक भरने की उम्मीद की जा सकती है। मैसूरु जिले में पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत केआरएस है। शहर की पेयजल जरूरतें भी केआरएस से ही पूरी होती हैं।

आमतौर पर दो अच्छी बारिश के बाद कबिनी जलाशय भर जाता है लेकिन इस बार इसका जलस्तर भी तलहटी में है। काबिनी जलाशय में महज 2.23 टीएमसी फीट जलभंडार रह गया है जबकि इसकी अधिकतम भंडारण क्षमता 19.52 फीट है। पिछले साल इसी समय काबिनी में 14.61 टीएमसी फीट जल था। जलाशयों में पानी नहीं होने के कारण तमिलनाडु के लिए पानी छोडऩा राज्य के लिए संभव नहीं होगा। जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पहली प्राथमिकता पेयजल है। ना तो बारिश हो रही है और ना ही जलाशयों में पानी है। ऐसे में तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सकता।
उधर, अलमत्ती बांध महाराष्ट्र में होने वाली बारिश के पानी पर निर्भर है। इसका अर्थ है कि अब अगर यह बांध भरेगा तो सितम्बर तक ही भरेगा। वहीं, तुंगभद्रा जलाशय के बारे में अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष जलाशय के भरने को लेकर संदेह है। तुंगभद्रा जलाशय में महज 2.12 टीएमसी पानी बचा है जबकि गत वर्ष इसमें 24.63 टीएमसी पानी था। आपदा प्रबंधन केंद्र के अधिकारियों के मुताबिक अगले दो-तीन दिनों में तटीय कर्नाटक में भारी बारिश की संभावना है।
चिक्कमग्गलूरु, हासन, कोडुगू और शिवमोग्गा में भी अच्छी बारिश की संभावना है। इससे स्थिति संभल सकती है। राज्य के दो अन्य जलाशयों हेमावती और लिंगनमक्की में भी क्रमश: 3.46 टीएमसी और 14.27 टीएमसी पानी रह गया है जबकि पिछले वर्ष इनमें क्रमश: 18.59 और 33.51 टीएमसी पानी था। मानसून के बादल छा रहे हैं लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है। उम्मीद है कि अगले दो तीन दिनों में हालात बदलेंगे और इन जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होगी।

Santosh kumar Pandey Desk
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