scriptmore rain due to impact of climate change 10101 | जलवायु परिवर्तन के असर से बदल रहा मौसम का मिजाज | Patrika News

जलवायु परिवर्तन के असर से बदल रहा मौसम का मिजाज

ग्लोबल वार्मिंग का भी प्रभाव: आने वाले समय में बढ़ सकती है बेमौसम बारिश
नवंबर महीने के 28 दिनों में चार दक्षिणी राज्यों में 124 से 282 प्रतिशत तक अधिक बारिश

 

बैंगलोर

Published: December 01, 2021 08:07:53 pm

बेंगलूरु. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असर मौसम के मिजाज पर भी पड़ रहा है। कभी अतिवृष्टि तो कभी सूखा। पिछले डेढ़ महीने के दौरान दक्षिणी राज्यों- कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को बेमौसम भारी बारिश और अचानक बाढ़ की स्थिति का सामाना करना पड़ा, जो असामान्य था। तेलंगाना को छोड़कर बाकी चार दक्षिणी राज्यों में नवंबर महीने के 28 दिनों में 124 से 282 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञानी इसे जलवायु परिवर्तन का असर मानते हैं।
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पिछले एक साल के दौरान जलवायु परिवर्तन और मौसम को लेकर आई विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्टों में भी इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि दक्षिणी राज्यों में मौसम संबंधी बदलावों का सर्वाधिक असर पड़ेगा। इस साल के शुरू में आई जलवायु परिर्वतन पर अंतर सरकारी (आइपीसीसी) की रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि होती रही तो कालांतर में दक्षिण भारतीय राज्यों में औसत से 40 प्रतिशत ज्यादा बारिश होगी। नए अध्ययन के मुताबिक तापमान में गर्म हवा के कारण उष्णकटिबंधीय वर्षा पट्टी उत्तर में हिंद महासागर की तरफ बढ़ रही है। इससे भविष्य में वर्षा की पद्धति प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं का राय है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण एक सदी में दक्षिणी राज्यों में मानूसन के दौरान बारिश की स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाएगी। कुछ महीने पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गांधीनगर की शोध रिपोर्ट में भी कहा गया था कि तापमान में वृद्धि के असर से दक्षिणी राज्य ज्यादा प्रभावित होंगे। दिल्ली के काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्वायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्लू) की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी क्षेत्र चरम जलवायु घटनाओं और उनके मिश्रित प्रभावों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
flood_30.jpgमौसम विज्ञानियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में आई बाढ़ और भारी बारिश मौसम में बदलाव का असर है। इस साल जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल में दस्तक देने से पहले हुई भारी बारिश भी इस बात का संकेत है कि जलवायु परिवर्तन का असर पडऩे लगा है। उत्तर-पूर्वी मानसून (दक्षिणी राज्यों के कुछ सीमित हिस्सों में अक्टूबर से दिसम्बर की अवधि) में भी इस साल भारी बारिश हुई है। दक्षिणी राज्यों में नवंबर महीने में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। महासागरों के तापमान में हो रही वृद्धि भी कम अंतराल पर बनने वाले विक्षोभ (कम दबाव का क्षेत्र ) का कारक है। पर्यावरणविदों का कहना है कि पश्चिमी घाट में घटती हरियाली का भी वर्षा पद्धति पर असर पड़ा है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन से उपजी समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक पहल नहीं हो पा रही है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर नीतियों से कार्यान्वयन तक उदासीनता रोड़ साबित हो रही है। पश्चिम घाट पर बनी समितियों की रिपोर्ट पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
किसान झेल रहे मार
मौसम के बदलते मिजाज की मार किसानों को झेलनी पड़ रही है। खासकर, सब्जियों की खेती करने वाले कृषक लगातार कई दिनों तक भारी बारिश से परेशान हैं। टमाटर, आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की सफल अप्रत्याशित बारिश के कारण खराब हो जाती है। बारिश की पद्धति में बदलाव से अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही है।
समग्र नीति बने
2005 के बाद से देश में चरम जलवायु घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्थिति से निपटने के लिए समग्र नीति बनाई जानी चाहिए। जलवायु प्रूफिंग बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय अनिवार्यता हो गई है।
अभिनाष मोहंती, लीड प्रोग्राम, सीईईडब्लू
नवंबर में बारिश का हाल

राज्य सामान्य औसत अंतर
कर्नाटक 39.9 152.6 282%
आंध्र प्रदेश 94.8 241.2 154%
केरल 150.6 374.3 149%
तमिलनाडु 171.9 384.7 124%
तेलंगाना 23.7 31.1 40%

आंकड़े 28 नवंबर तक मिलीमीटर में, स्त्रोत : मौसम विभाग

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