कोरोना महामारी ने छीनी सहकारिता संघों की सक्रियता

गत नौ माह में 3 हजार सहकारिता संघ निष्क्रिय

By: Sanjay Kulkarni

Updated: 12 Jan 2021, 05:35 AM IST

बेंगलूरु. हर क्षेत्र पर कोरोना महामारी का असर पड़ा है। सहकारिता क्षेत्र के लिए भी कोरोना महामारी एक शाप साबित हो रही है। महामारी के कारण वर्ष 2020 में अप्रैल से दिसंबर तक राज्य के तीन हजार से अधिक सहकारी संघ निष्क्रिय हो गए हंै।देहातों में आम लोगों को सहकारिता संघों के माध्यम से ही वित्तीय सहायता मिलती है। लेकिन कोई लेन-देन ही नहीं होने के कारण निष्क्रिय सहकारिता संघों के कार्यालयों पर ताले लगने की नौबत आ गई है।

संघों में सावधि जमा राशि रखने वाले उपभोक्ताओं को रकम वापसी की चिंता सता रही है। सहकारिता विभाग के सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2016-17 में राज्य में 41 हजार 402 में से 1 हजार 706 सहकारिता संघ निष्क्रिय हुए। 2017-18 में 42 हजार 543 में से 1 हजार 731, साल 2018-19 में 43 हजार 762 में से 2 हजार 165, साल 2019-20 में 44 हजार 571 सहकारिता संघों में से 2 हजार 521 संघ निष्क्रिय हुए।

दिसंबर 2020 तक नौ माह में 3 हजार सहकारिता संघों पर ताला लगा है।बीदर में सबसे अधिक 342 सहकारिता संघ निष्क्रिय हुए हैं। इस सूची में रायचूरु दूसरे स्थान पर है जहां 237 संघ बंद हो गए है। बेलगावी में 232, यादगिरी में 215, मंड्या में 175, धारवाड़ में 134 तथा कलबुर्गी में 121 सहकारी संघ बंद हो गए है।समग्र जांच जरूरीसहकारिता मंत्री एसटी सोमशेखर का कहना है कि सहकारी संघ बंद होने के कई कारण हो सकते हैं।

इसकी समग्र जांच होनी चाहिए। संघ बंद होने के कारणों का पता लगने के बाद उन्हें पुन: शुरू करने के प्रयास किए जा सकते हंै। सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। सहकारिता विभाग के नियमों के अनुसार सहकारिता संघों के लिए प्रतिवर्ष पंजीकरण का नविनिकरण करना अनिवार्य है। राज्य में कई सहकारिता संघों ने पंजीकरण के नविनिकरण को आवेदन नहीं दिए है। पंजीकरण के नवीनीकरण प्रमाणपत्र के बगैर सहकारिता संघों को वित्तीय लेन-देन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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