scriptMother's milk will reach the children away from the mother's lap | मां के आंचल से दूर बच्चों तक नि:शुल्क पहुंचेगा मां का दूध | Patrika News

मां के आंचल से दूर बच्चों तक नि:शुल्क पहुंचेगा मां का दूध

  • 40 महिलाओं ने कराया पंजीकरण

बैंगलोर

Updated: February 26, 2022 02:27:12 pm

बेंगलूरु. मां बनना किसी भी महिला के लिए सर्वोच्च सुख है और मां का दूध शिशु के लिए अमृत। किसी कारणवश मां के दूध से वंचित बच्चों के लिए रोटरी बेंगलोर जंक्शन और गुणशीला सर्जिकल और मातृत्व अस्पताल ने ऐसी योजना बनाई है जो उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। योजना के तहत एक अनूठे मानव दूध बैंक का उद्घाटन किया गया। बैंक किसी कारणवश दूध से वंचित बच्चों व उन महिलाओं के बीच एक सेतु का काम करेगा जिनमें अधिक दूध पिलाने की क्षमता है।
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इस अवसर पर प्रसिद्ध नियो-नेटोलॉजिस्ट डॉ श्रीकांत मणिकांति ने बताया कि यह सुविधा उन महिलाओं से स्तन दूध एकत्र करेगी, जिनके पास अतिरिक्त दूध है। इसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो दूध दाता के स्थान से भी एकत्र किया जाएगा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ब्रेस्ट मिल्क, जिसे अक्सर लिक्विड गोल्ड के रूप में जाना जाता है, उच्च पोषण से भरा होता है जिसका कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि रोटरी जरूरतमंद शिशुओं को यह दूध प्रदान करके मानवता की एक महान सेवा कर रही है।
नि:शुल्क मिलेगा दूध

रोटरी बेंगलूरु जंक्शन के मेंटर व पूर्व अध्यक्ष विजय सर्राफ ने बताया कि तीन साल पहले हमारे एक मित्र के परिवार में समय से पहले बच्चा हुआ तो दूध की कमी का एहसास हुआ। आखिर उस बच्चे का क्या कसूर है और उसे मां के दूध से क्यों वंचित रखा जाए। तभी यह विचार आया कि क्यों न ऐसी योजना पर काम किया जाए जिससे मां के दूध से वंचित बच्चों को मां का दूध मिल सके। योजना को अंजाम देने के लिए कई अस्पतालों से बात हुई और आखिरकार गुणशीला अस्पताल के साथ इस योजना पर बात बन गई। अब बच्चों को यह दूध नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
50 लाख की मशीन, 40 महिलाओं ने कराया पंजीकरण

सर्राफ ने बताया कि यह एक ओर जहां शिशु के लिए उपयोगी है वहीं जिन महिलाओं में अतिरिक्त दूध है, यह ऐसी महिला के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होगी। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए लगभग ५० लाख की लागत से अस्पताल में मशीन स्थापित की गई है जो एक सप्ताह तक मां के दूध को सुरक्षित रखेगी और उसकी पौष्टिकता बरकरार रखी जाएगी। योजना के लिए महिलाएं उत्साह से आगे आ रही हैं और अभी तक लगभग ४० महिलाओं ने पंजीकरण कराया है।
सर्राफ कहते हैं कि फिलहाल यह योजना बेंगलूरु में ही लागू की जाएगी। यह सफल रही तो राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।

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