एसयू लिन तारे के रहस्य से एस्ट्रोसैट ने उठाया पर्दा

लाल विशालकाय तारे के पास है श्वेत बौना तारा
अंतरिक्ष वेधशाला से ही संभव था इसकी प्रकृति को समझना

By: Rajeev Mishra

Published: 24 Dec 2020, 09:35 PM IST

बेंगलूरु.
भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट के जरिए भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के खगोलशास्त्रियों ने एसयू लिन नामक अनूठे तारे के रहस्य से पर्दा उठाया है।
एस्ट्रोसैट अंतरिक्ष वेधशाला के एक महत्वपूर्ण उपकरण अल्ट्रा वायरलट दूरबीन (यूवीआइटी) की क्षमता का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने इस तारे की प्रकृति को बेहतर ढंग से समझाया है।
दरअसल, एसयू लिन को लंबे समय से साधारण लाल विशालकाय तारा के रूप में जाना जाता रहा है। यह अत्यंत बृहद तारों की श्रेणी में आता है और तारकीय विकास के अंतिम चरण में बना है। लेकिन, वर्ष 2016 में यह देखा गया कि इस तारे से तीक्ष्ण एक्स-किरणों का उत्सर्जन हो रहा है। इससे यह संशय बढ़ा कि इसके पास छिपा हुआ एक अन्य गर्म साथी तारा है। अनुमान लगाया गया कि यह श्वेत बौना तारा हो सकता है। श्वेत बौने तारे सूर्य के द्रव्यमान के बराबर हो सकते हैं लेकिन, आकार में पृथ्वी के बराबर होते हैं। एक श्वेत बौने तारे तथा एक लाल विशाल तारे वाले युग्म को तारकीय प्रणालियों को सिम्बायोटिक प्रणाली के रूप में जाना जाता है। खगोल भौतिकी में यह अत्यंत रोचक माने जाते हैं।

धरती से संभव नहीं था अध्ययन
चूंकि, श्वेत बौने तारे गर्म होते हैं और अधिकांशत: पराबैगनी रेंज में विकिरण उत्पन्न करते हैं, इसलिए धरती पर मौजूद उपकरणों से उनका अध्ययन संभव नहीं था। क्योंकि, पराबैगनी विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल को भेद नहीं सकती। वहीं, अंतरिक्ष में कुछ ही अल्ट्रा वायलट दूरबीन हैं जिनमें से एक एस्ट्रोसैट जिसमें विशिष्ट उपकरण लगे हैं। एस्ट्रोसैट के अल्ट्रा वायलट दूरबीन पराबैगनी स्पेक्ट्रम को रिकार्ड करने में सक्षम हैं। यह एक ऐसी विशेषता है जो एसयू लिन के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।

एसयूलिन के सिम्बायोटिक अस्तित्व को साबित किया
पीआरएल की टीम वर्ष 2016 से एसयू लिन तारे का प्रेक्षण कर रही है। अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि एसयू लिन में श्वेत बौना तारा पारंपरिक सिम्बायोटिक प्रणाली में श्वेत बौने तारे की तुलना में कम परिमाण में चमक पैदा करने वाला है। इसके कारण सिम्बायोटिक प्रणाली में होने तीव्र आयनीकृत उत्सर्जन के प्रमाण एसयू लिन में नहीं मिल रहे थे। लेकिन, एस्ट्रोसैट के प्रेक्षणों से यह साबित हुआ है कि एसयू लिन भी सिम्बायोटिक प्रणाली वाला तारा है।

हमारी आकाशगंगा में केवल कुछ सौ सिम्बायोटिक प्रणालियां हैं। यह उनके हजारों की संख्या में होने के पूर्वानुमान के विपरीत है। इसकी उच्च संभावना है कि एसयू लिन प्रकार के अनेक सिम्बायोटिक तारों का अस्तित्व है, जिनका पारंपरिक विधियों से अभी तक खोज नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि एस्ट्रोसैट का प्रक्षेपण वर्ष 2015 में 28 सितम्बर को किया गया था। इसकी 650 किमी की ऊंचाई की धु्रवीय कक्षा में स्थापना के बाद से भारतीय वैज्ञानिकों को नई और बेहद महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।

Rajeev Mishra Reporting
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