स्तन कैंसर मरीजों को योग सिखा रहा मैसूरु विवि

स्तन कैंसर मरीजों को योग सिखा रहा मैसूरु विवि

Shankar Sharma | Publish: May, 22 2019 12:17:53 AM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

स्तन कैंसर से जूझ रहीं महिला मरीज और इससे निजात पा चुकीं मरीजों को मैसूरु विश्वविद्यालय का जैव प्रौद्योगिकी विभाग योग और ध्यान के सहारे राहत प्रदान कर रहा है।

मैसूरु. स्तन कैंसर से जूझ रहीं महिला मरीज और इससे निजात पा चुकीं मरीजों को मैसूरु विश्वविद्यालय का जैव प्रौद्योगिकी विभाग योग और ध्यान के सहारे राहत प्रदान कर रहा है। कई मरीजों का कहना है कि गत एक वर्ष में उनकी इच्छाशक्ति मजबूत हुई है। तनाव और अवसाद से उबरने में मदद मिल रही है। वे जीवन में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित हुईं हैं।


६० वर्षीय एक मरीज ने बताया कि नौ माह पहले चिकित्सकों ने सर्जरी कर स्तन निकाला था। जिसके बाद लंबे समय तक वे अपने हाथों को उठा नहीं पाती थीं, लेकिन योग व ध्यान से बेहद फायदा हुआ। अब वे पहले से ज्यादा ऊर्जावान महसूस करती हैं। ५० वर्षीय एक अन्य मरीज ने बताया कि वर्ष २०१५ में स्तन कैंसर का पता चला। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दौरान और बाद में वे अवसादग्रस्त हो गईं। घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। योग से जिंदगी काफी हद तक पटरी पर लौट गई है।


स्तन कैंसर मरीजों पर योग और ध्यान का प्रभाव संबंधित अध्ययन के तहत फिलहाल ३० से ७० आयु वर्ग की ३० मरीज प्रशिक्षण ले रही हैं। मरीजों को वही आसन सिखाए जाते हैं जिन्हें योग विवि, आयुष विभाग ने कैंसर मरीजों के लिए सुरक्षित माना है। योग प्रशिक्षण के अलावा सभी मरीज माह में एक बार बैठक करती हैं। बीमारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करती हैं। हर ४ माह में मरीजों की जांच कर योग और ध्यान के प्रभाव की समीक्षा होती है। परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं। हालांकि विभाग ने साफ किया है कि योग से कैंसर ठीक नहीं हो सकता है। सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी आदि की जरूरत पड़ती है।

चिंता किसी समस्या का हल नहीं
मैसूरु. जैन संघ महावीर भवन गुंडलपेट में विराजित शिष्या साध्वी प्रतिभाश्री ने कहा की चिंता समस्याओं को बढ़ाती हैं। चिंता नहीं समाधान करें क्योंकि चिंता समाधान नहीं समस्या हंै। सच्चाई तो यह है कि चिंता किसी समस्या का हल नहीं, अपितु अपने आप में एक बड़ी समस्या है। जैसे-जैसे यह हमारे जिंदगी में पांव पसारना शुरू करती है, वैसे-वैसे तन, मन, धन तीनों को ही खाना शुरू कर देती है। इसलिए हमेशा चिंतन करें। साध्वी प्रेक्षाश्री ने कहा कि जीवन में बहुत कुछ पाने के लिए बहुत कुछ त्यागना पड़ता है।

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