रोजगार गारंटी योजना बनी बेरोजगारों का सहारा

उच्च शिक्षित युवा भी इस योजना में शामिल होकर दिहाड़ी मजदूरी कर रहें है

By: Sanjay Kulkarni

Published: 02 Aug 2020, 09:35 PM IST

बेंगलूरु. लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में बेरोजगार हुए शहरवासी वापस अपने गांव चले गए हैं। ऐसे लोगों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंंटी (नरेगा) योजना सबसे बड़ा सहारा साबित हो रही है। अपने गांव पहुंचे उच्च शिक्षित युवा भी इस योजना में शामिल होकर दिहाड़ी मजदूरी कर रहें है।

योजना के अंतर्गत देहातों में जलकुंडों का निर्माण, सड़क तथा तालाबों की खुदाई जैसे काम कराए जा रहे हंै। दावणगेरे, हावेरी, चित्रदुर्ग, धारवाड़, कोप्पल, रायचूर, गदग, यादगीर, तुमकूरु तथा बल्लारी जैसे जिलों में छह माह से बड़ी संख्या में जॉब कार्ड तैयार किए गए हैं।इस योजना में प्रति दिन 275 रुपए मजदूरी दी जा रही है।

देहातों में हाल में विभिन्न शहरों से लौटे युवाओं के पास रोजगार का कोई अन्य विकल्प नहीं होने से स्नातक, स्नातकोत्तर शिक्षित युवा भी यहां दिहाड़ी मजदूर बने हुए हैं।तुमकूर जिला पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शुभा कल्याण के अनुसार जिले में गोचर भूमि पर पौधरोपण के साथ बारिश के पानी का संग्रहण करने के लिए जलकुंडों का निर्माण, तालाबों की सफाई कर सिल्ट को कृषि भूमि तक पहुंचाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

जिले में इस योजना के अंतर्गत कृषि, रेशम, बागवानी, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज आदि विभागों में रोजगारों का सर्जन किया जा रहा है। जिले की सभी 10 तहसीलों में इस योजना में शामिल लोगों को पहचान पत्रों के आधार पर जोड़ा गया है। जिले के 51 हजार 300 लोगों को रोजगार मिल रहा है। पुरुषों को 4 रुपए तथा महिलाओं को 5 रुपए अतिरिक्त प्रोत्साहन मजदूरी दी जा रही है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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