लॉकडाउन के कारण कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट

नासा, जाक्सा और ईसा के उपग्रहों ने किया अध्ययन
तीनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने किया था टास्क फोर्स का गठन

By: Rajeev Mishra

Updated: 28 Jun 2020, 09:52 PM IST

बेंगलूरु.
विश्व के अन्य देशों की तरह भारत में भी लॉकडाउन के दौरान ग्रीनहाउस गैसों और कार्बन डॉइ-ऑक्साइड के उत्सर्जन में भारी कमी दर्ज की गई। वाहनों के पहिए थमने और उद्योगों का परिचालन बंद होने से जहां जीवाश्म ईंधन का दहन रूका हुआ वहीं, पर्यावरण पर इसका सकारात्मक असर देखा गया।

इस संदर्भ में अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी 'ईसा' और जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने मिलकर पहली बार लॉकडाउन के दौरान धरती और पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन किया। इसके लिए तीनों एजेंसियों ने अपने भू-अवलोकन उपग्रहों के जरिए आंकड़े एकत्रित किए। ये उपग्रह वायु और पानी की गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक गतिविधियों और कृषि कार्यों पर नजर रखने के लिए धरती की निचली कक्षाओं में स्थापित किए गए हैं। नासा ने कहा है कि तीनों एजेंसियों ने अप्रेल में ही एक संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया था जिसने इस अध्ययन के लिए उपयुक्त उपग्रहीय आंकड़ों को एकत्रित किया। इस दौरान अंतरिक्ष से यह देखने का प्रयास हुआ कि कोरोना महामारी के कारण मानव गतिविधियों के पैटर्न बदलने से धरती पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

भारत के संदर्भ में प्रारंभिक अध्ययनों से पता चला कि लॉकडाउन ने वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड के संचय को धीमा कर दिया। अध्ययन में नई दिल्ली और मुंबई के परिणाम मिलते-जुलते आए। नासा के उपग्रह आर्बिटिंग कार्बन ऑब्जर्वेटरी-2 (ओसीओ-2) और जापान के उपग्रह ग्रीन हाउस गैसेज ऑब्जर्विंग सैटेलाइट (जीओसैट) ने मुंबई, टोक्यो, न्यूयॉर्क, बीजिंग आदि में कार्बन डाइ-ऑक्साइड उत्सर्जन को ट्रैक किया। परिणामों से पता चलता है कि प्रत्येक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन 0.5 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) अथवा 0.125 प्रतिशत कम हुआ।

यातायात और औद्योगिक गतिविधियों में कमी आने से तीन महीने के लॉकडाउन के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आई। नई दिल्ली और मुंबई में 25 मार्च से 20 अप्रेल के बीच नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर में 40 से 50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह गिरावट पूरे देश में एक समान नहीं है। पूर्वोत्तर भारत में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के परिचालन से नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर निरंतर देखा गया।

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Rajeev Mishra Reporting
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