प्लांट ब्रीडिंग से खाद्यान्न उत्पादन में कई गुणा वृद्धि संभव : डॉ कुलदीप

Shankar Sharma

Publish: Sep, 16 2017 09:10:07 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
प्लांट ब्रीडिंग से खाद्यान्न उत्पादन में कई गुणा वृद्धि संभव : डॉ कुलदीप

आजादी से पहले देश की आबादी की भूख मिटाने के लिए खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन नहीं था। लिहाजा हमें खाद्यान्न के लिए विदेशों पर निर्भर होना पड़ता था

बेंगलूरु. आजादी से पहले देश की आबादी की भूख मिटाने के लिए खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन नहीं था। लिहाजा हमें खाद्यान्न के लिए विदेशों पर निर्भर होना पड़ता था। लेकिन हरित क्रांति के पश्चात हालात बदल गए हैं। अब देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है और निर्यात भी करता है। नैशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जैनेटिक रिसोर्स के निदेशक डॉ.कुलदीप सिंह ने यह बात कही।


कृषि विवि के जीकेवीके कैंपस में शुक्रवार को ‘नेक्स्ट जनरेशन प्लांट ब्रीडिंग’ पर आयोजितराष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने कहा कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है। लगभग 160 करोड़ की आबादी के साथ वर्ष 2050 में भारत विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा। ऐसे में इस आबादी की मांग के अनुपात में खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित करने में प्लांट ब्रीडिंग बड़ी भूमिका निभाएगी। इससे धान, गेहँू जैसे अनाजों के साथ फल तथा सब्जियों के उत्पादन में कई गुणा वृद्धि संभव है।


उन्होंने कहा कि बेमौसम की बारिश, वातावरण में अप्रत्याशित बदलाव, तापमान में अनपेक्षित परिवर्तन, फसलों में विभिन्न रोगों का संक्रमण जैसी कई प्राकृतिक समस्याओं के कारण देश में खाद्यान्न के उत्पादन में लगातार गिरावट हो रही है। साथ में मौजूदा अनाज सब्जियां तथा फलों में पौष्टिक तत्वों की गिरावट भी एक गंभीर समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए अब हमें जैनेटिक प्लांट ब्रिडिंग पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। इस क्षेत्र में अनुसंधान से किसानों को रोग प्रतिरोधक क्षमता युक्त बीज वितरित करने होंगे।
जैनेटिक प्लांट ब्रीडिंग से ही खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के साथ इनकी पौष्टिकता में वृद्धि संभव है। इस तकनीक से विकसित पौधों में रोध निरोधक क्षमता अधिक होने के कारण प्रति एकड़ उत्पादन और किसानों की आय में कई गुणा वृद्धि होगी।


उन्होंने कहा कि जैनेटिक प्लांट बी्रडिंग में 20 वर्ष से हो रहे अनुसंधान उत्साहवर्धक है। देश में अनाज उत्पादन वृद्धि के लिए यह तकनीक अब एक आशा के किरण के रूप में उबर रही है। विश्व की जैविक विविधता में देश में माइक्रोव्ज, प्लांट तथा प्राणियों की संख्या में भारत का हिस्सा 8.25 फीसदी है। हमारे देश में 850 सूक्ष्मजीव, 4,55,23 वनस्पतियां तथा 89,492 किस्म के पशु-पक्षी देश में मौजूद है। इस जैव विविधता से छेड़छाड़ हमें बहुत महंगी साबित होगी। प्राकृतिक संतुलन बरकार रखने के लिए इस जैव विविधता की रक्षा करना हमारा सामाजिक दायित्व है।


सेमिनार में बेंगलूरु कृषि विवि के कुलपति डॉ शिवण्णा, डॉ शैलजा हित्तलमनी, डॉ एस. राजेंद्र प्रसाद, डॉ एम.बैरेगौड़ा तथा डॉ के.गंगप्पा, डॉ वाईजी षडाक्षरी ने विचार व्यक्त किए।

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