'नाविक' में हो चुकी है छह साल की देरी: कैग

'नाविक' में हो चुकी है छह साल की देरी: कैग

Rajeev Mishra | Publish: Mar, 14 2018 07:02:33 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

प्रशासनिक ढिलाई के चलते तैयार नहीं हुआ स्वदेशी जीपीएस, 90 फीसदी राशि खर्च मगर उपग्रहों का उपयोग नहीं

बेंगलूरु. स्वदेशी क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (नाविक) समय सीमा पूरे होने के छह साल बाद भी तैयार नहीं हो पाई है जबकि अंतरिक्ष एजेंसी ने आवंटित बजट का 90 फीसदी खर्च कर दिया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में इसे 'सरासर प्रशासनिक ढिलाईÓ का नतीजा बताया है।
कैग ने स्वदेशी जीपीएस नाविक के ऑपरेशनल होने में विलंब पर तीखी टिप्पणी की है और कहा है कि कुछ हद तक भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो भी इसके लिए जिम्मेदार है। क्योंकि, कुछ ठेके परियोजना मंजूर किए जाने के बावजूद लगभग 9 साल बाद दिए गए। लगभग सारे ठेके आवंङ्क्षटत करने में 2 से 9 साल तक की देरी हुई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2006 में ही नाविक प्रणाली के लिए 1429 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए थे और परियोजना को दिसम्बर 2011 तक तैयार हो जाना था। इसके तहत सात उपग्रहों (आईआरएनएसएस-1 ए से 1 जी तक) को एक नक्षत्र की तरह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करना था जबकि आम आदमी व सैन्य संचालन के लिए जमीनी सेगमेंट व अन्य तैयारियां पूरी की जानी थी। लेकिन, नाविक कार्यक्रम जून 2017 तक तैयार नहीं हो पाया।
कार्यक्रम के लिए 45 अनुबंधों की लेखा परीक्षा से पता चला कि इन्हें पूरा करने में 2 से 9 साल की देरी हुई। सात अनुबंध पांच साल की देरी के बावजूद मई 2017 तक पूरा नहीं हो पाए थे। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी रहा कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए बेहतर समन्वय का अभाव रहा और समय पर पूरा करने के लिए पीछा नहीं किया गया। प्रशासनिक तौर पर काफी ढिलाई बरती गई। हालांकि, कैग ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ चीजें इसरो के वश के बाहर थी। जैसे एक उपग्रह आईआरएनएसएस-1 एच का प्रक्षेपण विफल हो गया जिसे रिप्लेसमेंट उपग्रह के तौर पर भेजा जाना था। कार्यक्रम के लिए अंतरिक्ष सेगमेंट में देरी नहीं हुई लेकिन हर उपकरण और जमीनी सेगमेंट समय सीमा के भीतर तैयार नहीं हो पाया। कैग ने कहा कि इस श्रृंखला के उपग्रहों की परिचालन अवधि 10 से 12 साल की है जबकि लगभग 14 महीने से लेकर 4 साल पहले तक भेजे गए उपग्रह अंतरिक्ष में बेकार पड़े हैं। इसमें जितनी देरी होगी उतनी ही उपग्रहों की परिचालन अवधि कम होती जाएगी।
इस बीच इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कैग की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि नाविक पूरी तरह ऑपरेशनल है। नौसंचालन के लिए इसरो ने जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया है लेकिन अब यह उद्योगों पर है कि वह बड़े पैमाने पर चिपसेट का उत्पादन करें जिसका उपयोग नेविगेशन डिवाइस में किया जाना है।

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