दोषियों को सजा दिलाने में विफल एनडीपीएस ऐक्ट

एनसीआरबी की ओर से जारी रिपोर्ट इस सच्चाई बयां कर रही है।

By: Sanjay Kulkarni

Published: 15 Sep 2020, 03:31 PM IST

बेंगलूरु.मादक पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लाने के लिए लाया गया नारकोटिक ड्रग्ज एन्ड साइकोट्रोपिक सबस्टंस (एनडीपीएस) एक्ट 1985 प्रभावहीन साबित हो रहा है।इस कानून के तहत प्रति वर्ष सैकडों मामले दर्ज होते है।सैकड़ों आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जाता है लेकिन गिने चुने आरोपियों को ही सजा हो रही है।लिहाजा जिस लक्ष्य को लेकर यह कानून जारी किया गया था। वह लक्ष्य हासिल करने में यह कानून विफल रहा है।हाल में हाल में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी रिपोर्ट इस सच्चाई को बयां कर रही है। तीन हजार गिरफ्तार 164 को सजा एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक में गत चार वर्षों के दौरान इस कानून के तहत वर्ष 2019 में दर्ज 1660 मामलों में लगभग तीन हजार लोगों को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद इनमें से केवल 164 आरोपियों को सजा हुई है। वर्ष 2019 में दर्ज 1660 मामलों में से 827 मामलों की जांच जारी है। 663 मामलों की अदालतों में सुनवाई जारी है।इस वर्ष 164 आरोपियों को सजा हुई है। वर्ष मामले सजा 2017 1127 1512018 1032 1282019 1660 1642020 1255 94 जुलाई माह तक कर्नाटक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शेषाचलय्या के मुताबिक ऐसे मामलों में सबुत जुटाना आसान नहीं होता है।फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के आधार पर मामले का फैसला तय होने के कारण इन मामलों को साबित करने के अकाट्य सबुत जुटाने के लिए काफी मेहनत करनी पडती है।फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए 5-6 माह तक इंतजार करना पडता है।साथ में इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों को जमानत लेना काफी आसान होने के कारण ऐसे मामले लंबे अंतराल तक चलते रहते है।अंतत: सबुतों के अभाव में अधिकतर आरोपी छूट जाते है।इस कमजोर कानून को सशक्त बनाने के लिए इस कानून में व्यापक संशोधनों की दरकार है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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