जन्मभूमि और मातृभाषा को कभी नहीं भूलें

उपराष्ट्रपति वेंकय्या नायडू ने रखी बात

By: arun Kumar

Published: 25 Nov 2018, 07:46 PM IST

 

चिक्कबल्लापुर. हम चाहे जितनी भाषाओं का अध्ययन कर सकते है लेकिन हमें मातृभाषा को कतई नहीं भूलना चाहिए। उपराष्ट्रपति वेंकय्या नायडू ने यह बात कही। जिले के मुद्देनहल्ली में शुक्रवार को श्री सत्य साई शिक्षा संस्था के परिसर में सत्य साईबाबा की 93 वी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कन्नड़ भाषा में भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि कर्नाटक के साथ उनका 40 वर्षों का भावनात्मक रिश्ता होने से कन्नड़ भाषा तथा कन्नड़ भाषियों के लिए उनके हृदय में एक विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि हम चाहे जिस उच्च पद पर क्यों न पहुंचे हो हमें हमारे माता-पिता, हमारी जन्मस्थली, हमारा देश तथा हमें प्राथमिक शिक्षा देने वाले शिक्षकों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमें पूरे विश्व एक परिवार मानने की संस्कार दिए है। हम केवल अपने परिवार का नहीं बल्कि समस्त विश्व के कल्याण की कामना करते है। उन्होंने कहा कि सत्यसाई बाबा का सरल जीवन देश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने हमें समाज सेवा के माध्यम से समाज का ऋण चुकाने का संदेश दिया है। जो लोक समाज के लिए जीते हैं ऐसे लोगों को समाज सदैव याद रखता है। इस अवसर पर राज्यपाल वजुभाई वाळा, कृषि मंत्री शिवशंकर रेड्डी भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर उपस्थित थे।

व्यक्ति का जीवन ऐतिहासिक बने

श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अलसूर ने साध्वी नेहाश्री को चातुर्मास समाप्ति प्रसंग पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विदाई दी। साध्वी नेहाश्री ने कहा कि चातुर्मास ऐतिहासिक नहीं, बल्कि व्यक्ति का जीवन ऐतिहासिक बनना चाहिए। चातुर्मास की साधना से हमारे जीवन में बदलाव झलकनी चाहिए और हम श्रद्धा संपन्न, व्रत संपन्न और विनय संपन्न बनें। साध्वी जिज्ञासाश्री ने लोकाशाह जयंती के संदर्भ में कहा कि उन्होंने स्थानकवासी परंपरा में परिषहों को सहन करते हुए आचार क्रांति की थी। साध्वी दीप्तिश्री ने भजन पेश किया।

arun Kumar
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned