नव उल्लास लाता है पर्युषण पर्व

नव उल्लास लाता है पर्युषण पर्व

Shankar Sharma | Publish: Sep, 08 2018 10:15:18 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

तेरापंथ सभा में मुमुक्षु रोनक ने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है, हमें मनुष्य भव प्राप्त हुआ है। जैन धर्म मिला है, भगवान महावीर का शासन प्राप्त हुआ है।

हासन. तेरापंथ सभा में मुमुक्षु रोनक ने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है, हमें मनुष्य भव प्राप्त हुआ है। जैन धर्म मिला है, भगवान महावीर का शासन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व जीवन में एक नया उल्लास लेकर आता है। वासना से आसना की ओर ले जाने का, आलस्य को त्यागकर धर्म, ध्यान, सामायिक कर अपने आपको शुद्ध बनाने का पैगाम लेकर आता है।

त्याग, तपस्या, उपवास कर जीवन को सार्थक बनाना है। इन आठ दिनों में पाई गई ऊर्जा पूरे वर्ष में हमें एक नई चेतना से भर देता है। मुमुक्षु स्नेहा, मुमुक्षु पूजा, मुमुक्षु दीप्ति ने गीतिका का संगान किया। सभाध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी ने स्वागत किया।

पर्युषण उत्तम और पवित्र पर्व
बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर ने कहा कि पर्युषण उत्तम और पवित्र पर्व है। जिनेश्र परमात्मा के पवित्र जिन शासन में अनेकानेक विशिष्ट कोटि के पर्व हैं परंतु उन सब पर्वों में पर्युषण महापर्व सर्वोत्कृष्ट और शिरोमणि पर्वाधिराज पर्व है। उन्होंने कहा कि यह आत्म खोज का अमूल्य अवसर है। पर्युषण यानी विषय और कषाय के ताप संताप से संतप्त बनी हुई आत्माओं के चित्त में, मन में अपूर्व शीतलता प्राप्त कराने का विराट विस्तारित वटवृक्ष पर्युषण पर्व पांच कर्तव्य अमारि प्रवर्तन, साधर्मिक भक्ति, क्षमापना, अ_म तप व चैत्य परिपाटी है।


अंधकार से प्रकाश का मार्ग स्वाध्याय
बेंगलूरु. हनुमंतनगर स्थित जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने ‘अंधकार से प्रकाश का मार्ग-स्वाध्याय’ विषय पर कहा कि स्वाध्याय ज्ञानवृद्धि का प्रमुख साधन है। अनादिकाल से यह जीवात्मा मिथ्यात्व के अंधकार में पड़ी हुई है। जब तक सम्यक दर्शन का स्पर्श नहीं हो जाता है तब तक वह आत्मा संसार रूपी जन्म मरण के चक्र से मुक्त नहीं हो सकती है। व्यक्ति हमेशा गुण दृष्टि रखें।

यदि आप दूसरों की कमियों को देखोगे, आलोचना और बुराई करोगे तो एक न एक दिन दूसरों की बुराइयां आपके अंदर भी आ जाएंगी। साध्वी ने अंतगड़ दसा सूत्र में वर्णित देवकी माता के कथानक पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ कराया। साध्वी सुविधि ने भजन प्रस्तुत किया। साध्वी सुदीप्ति ने अंतगड़ दसा सूत्र का वाचन किया। दोपहर में कल्पसूत्र वाचन व संगीत प्रतियोगिता हुई। श्रावकों ने पाश्र्व पदमावती जाप एकासना की साधना की। संचालन सहमंत्री रोशनलाल बाफना ने किया।


भक्त के भी भक्त बनें
बेंगलूरु. सीमंधर शांतिसूरी जैन ट्रस्ट वीवीपुरम में आचार्य चंद्रभूषण सूरी ने कहा कि प्रभु का परम श्रावक वही है जो प्रभु के भक्त का भक्त बने। उन्होंने कहा कि समान धर्म वालों को साधर्मिक कहा जाता है। सभी साधर्मिक प्रभुवीर के भक्त हैं। घर में रह रहा व्यक्ति अगर दुखी है तो उसका दुख हम देख नहीं सकते। कैसे भी उसकी सहायता हम करते हैं। उसी तरह वीर के संतान कोई भी हों अगर वह दुखी है तो उसकी सहायता हमें अवश्य करनी चाहिए।

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