नई स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा नीति जल्द : डॉ. सुधाकर

  • मुख्यमंत्री ने किया वाजपेयी आयुर्विज्ञान व अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन

By: Nikhil Kumar

Published: 30 Dec 2020, 10:43 AM IST

बेंगलूरु. चिकित्सकों की मांग को पूरी करने के लिए राज्य मेें और अधिक चिकित्सा महाविद्यालयों की जरुरत है। इसके लिए सरकार सरकारी-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना करेगी।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. के. सुधाकर ने मंगलवार को शिवाजीनगर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान व अनुसंधान संस्थान (Atal Bihari Vajpayee Institute of Medical Sciences and Research centre ) के नए भवन के उद्घाटन समारोह में कही। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने किया। सुधाकर ने कहा कि राज्य के पास जल्द ही खुद का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS - एम्स) होगा। अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से ही प्रगति पर है। वर्ष 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय स्वास्थ्य नीति तैयार की गई थी। 15 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में नई जरूरतों के अनुसार एक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लाई। राज्य में जल्द ही एक नई स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा नीति बनाई जाएगी।

10 से 12 हजार की आबादी पर एक चिकित्सक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति हजार आबादी पर एक चिकित्सक होना चाहिए। लेकिन, देश में 10 से 12 हजार की आबादी पर एक चिकित्सक है। प्रधानमंत्री मोदी ने छह वर्षों के कार्यकाल में 157 से ज्यादा नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य देश भर में 22 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापित करने का है।

गुजरात की तरह पीपीपी मॉडल अपनाएगी सरकार
डॉ. सुधाकर ने कहा कि चिकित्सकों की मांग को पूरा करने के लिए कर्नाटक में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ानी होगी। सरकार पीपीपी मॉडल के तहत नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करना चाहती है। एक मेडिकल कॉलेज पर 600-700 करोड़ रुपए की लागत आती है। पीपीपी मॉडल के तहत कॉलेज खुलेंगे तो सरकार पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। जरूरमंदों को सस्ती चिकित्सा शिक्षा और उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह मॉडल गुजरात में अपनाया जा रहा है और इसे यहां लागू किया जाएगा।

Nikhil Kumar Reporting
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