अल्जाइमर उपचार के लिए कारगर दवा विकसित होने की उम्मीद बढ़ी

जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिकों ने विकसित किया एक विशेष अणु
न्यूरॉन निष्क्रिीय होने वाली प्रक्रिया को बाधित करने में सक्षम है नव विकसित अणु

By: Rajeev Mishra

Published: 27 Feb 2021, 09:33 PM IST

बेंगलूरु.
जवाहरलाल नेहरु सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा छोटा अणु विकसित किया है, जिसमें अल्जाइमर्स रोगियों के उपचार के लिए एक भरोसेमंद दवा बनने की संभावना है।

दस साल के प्रयास का नतीजा
जेएनसीएएसआर में प्रोफेसर टी. गोविंदराजू की अगुवाई में वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस नए छोटे अणुओं के समूह को तैयार और संश्लेषित किया है। पत्रिका से बात करते हुए गोविंदराजू ने बताया कि इसे अभी तक की एक शानदार खोज कह सकते हैं। वैज्ञानिक इसके लिए पिछले दस साल से प्रयास कर रहे थे। दरअसल, यह अणु उस प्रक्रिया को बाधित कर देता है जिससे अल्जाइमर्स रोगियों के न्यूरॉन निष्क्रिीय हो जाते हैं। यह अणु दुनिया भर में डिमेंशिया (70-80 फीसदी) की प्रमुख वजह को रोकने या उसके उपचार में काम आने वाली संभावित दवा का कैंडीडेट बन सकता है।

विषाक्तता को करेगा निष्प्रभावी
उन्होंने बताया कि अल्जाइमर्स से पीडि़त व्यक्ति के मस्तिष्क में प्राकृतिक रूप से बनने वाले प्रोटीन के पिंड असामान्य स्तर तक जमा होकर फलक तैयार करते हैं। यह फलक न्यूरॉन्स के बीच जमा हो जाता है जिससे कोशिका कार्य बाधित होता है। ऐसा ऐमिलॉयड पेप्टाइड (एबीटा) के निर्माण और जमा होने के कारण होता है, जो केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली में एकत्र हो जाता है। एमिलॉयड की विषाक्तता के चलते अल्जाइमर बीमारी (एडी) के प्रभावी उपचार का विकास नहीं हो पाया है।

चूहों पर प्रयोग कारगर
गोविंदराजू की टीम द्वारा विकसित अणु एमिलॉयड बीटा (एबीटा) की विषाक्तता कम कर सकता है। इसका नाम 'टीजीआर 63' रखा गया है। यह अणु न्यूरोनल कोशिकाओं को एमिलॉयड विषाक्तता से बचाने के लिए एक प्रमुख कैंडिडेट सिद्ध हुआ है। आश्चर्यजनक रूप से यह अणु कोर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस, या टेम्पोरल लोब में गहराई में मौजूद जटिल हिस्से पर एमीलॉयड के बोझ को घटाने और संज्ञानता में कमी की स्थिति को पलटने में कारगर है। वर्तमान में अल्जामर्स का उपलब्ध उपचार सिर्फ अस्थायी राहत उपलब्ध कराता है और इसकी ऐसी कोई स्वीकृत दवा नहीं है जो सीधे रोग तंत्र के उपचार में काम आती हो। वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर से प्रभावित चूहों के मस्तिष्क का जब टीजीआर63 से उपचार किया तो एमिलॉयड जमाव में खासी कमी देखने को मिली। इससे उपचार संबंधी प्रभाव की पुष्टि हुई है। अलग व्यवहार से जुड़े परीक्षण में चूहों में सीखने का अभाव, स्मृति हानि और अनुभूति घटने की स्थिति में कमी आने का पता चला है।

Rajeev Mishra Reporting
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