भविष्य की चिंता नहीं, आज को सही तरीके से जीएं

श्रीरंगपटट्ण में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 26 Aug 2020, 08:10 AM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा चातुर्मास कर रही हैं। धर्मसभा में साध्वी डॉ. पदमकीर्ति ने कहा कि मनुष्य को भविष्य की चिंता न करते हुए अपने आज को सही तरीके से जीना होगा।

उन्होंने एक कहानी के माध्यम से दुख का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि एक छोटे बच्चे के हाथ में रबड़ बैंड जैसा कुछ दिया जाए तो सारा दिन वह उसको खींच-खींच कर लंबा करने का प्रयास करता है। कोई युवक के हाथ में इलास्टिक दिया जाए तो वह उसे खींचा ही करता है। बस कुछ ऐसे ही, छोटा भी दु:ख आ जाए तो मनुष्य उसको रोने का बहाना बना कर, रो-रो कर अत्यंत लंबा कर देता है। उन्होंने कहा कि जो भूतकाल हमारे हाथ से चला गया हो, बीत गया, उसको खींच-खींच कर वापस वर्तमान में लाना, याद कर के पीडि़त होने की क्या आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को सुखी कर सके ऐसा और कोई नुस्खा भी नहीं है। मनुष्य स्वयं ही इसका इलाज कर सकता है। दुख के पल याद कर रोना बंद कर दें और भूतकाल का कठिन समय याद करना बंद कर दे तो वह सुखी हो सकता है।

समिति के कार्याध्यक्ष मानमल दरला ने बताया कि धर्मसभा में क्षमायाचना का क्षमा का भाव लेकर जैन कॉन्फ्रेंस के केसरीमल बुरड़, मुन्ना बाफना, ज्ञानचंद, विनोद, नरेंद्र सहित अनेक लोग श्रीरंगपट्टनण पहुंचे।

Santosh kumar Pandey Desk
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