चंचलता से शोर शराबा और गंभीरता से शांति-डॉ. समकित मुनि

धर्मसभा का आयोजन

By: Yogesh Sharma

Updated: 16 Sep 2020, 12:04 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में विराजित डॉ. समकित मुनि ने तीर्थंकर की महिमा गाते हुए कहा कि तीर्थंकरों में अद्भुत परिपक्वता होती है। वैसी ही गंभीरता हममें भी आए ऐसा प्रयास लोगस्स पाठ की साधना करते समय होना चाहिए। मुनि ने भगवान महावीर का जीवन वृतांत सुनाया और कहा कि हमारे बोलने से यदि परिवार में झगड़े होते हैं तो चुप हो जाओ, हमारे किसी स्थान पर रहने से किसी को भी तकलीफ होती हो तो वहां से हट जाना ही भला है। बहुत से व्यक्ति अपनी परिपक्वता के कारण बड़ी बात को भी छोटी बना देते हैं, जिसके कारण परिवार समाज में वातावरण दूषित नहीं होता। जीवन में परिपक्वता रखने से बात का बतंगड़ बनना बंद हो जाता है। चंचलता से शोर शराबा होता है और गंभीरता से शांति स्थापित होती है। श्रावक वही होता है जो किसी की गलती नजर आने पर उस गलती का ढिंढोरा नहीं पीटता बल्कि उसका समाधान निकालता है। चंचलता से बात बिगड़ती है और परिपक्वता बात बनाती है। सती चेलना की कथा सुनाते हुए मुनि ने कहा महारानी चेलना के प्रयास से राजा श्रेणिक का अनादिकाल का मिथ्यात्व का अंधकार दूर हो जाता है। सैनिक को ऐसी दृढ़ समकित की उपलब्धि हो जाती है, देव-गुरु-धर्म पर ऐसी अपरंपार श्रद्धा हो जाती है जो उसे भविष्य मे तीर्थंकर बना देगी। सैनिक की धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा को देखकर देव भी परीक्षा लेने धरती पर आते हैं, परंतु सैनिक धर्म से रंच मात्र भी डिगता नहीं। प्रवक्ता प्रेमकुमार कोठारी ने बताया कि धर्मसभा में इंदरचंद भंसाली, देवराज चोपड़ा, सोहनराज धारीवाल, अशोक कोठारी आदि श्रावक उपस्थित थे। संचालन संघमंत्री मनोहरलाल बंब ने किया।

Yogesh Sharma Reporting
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