‘इतना साहस सभी में नहीं होता’

  • उपन्यास ‘काव्या’ का विमोचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 04 Oct 2021, 07:34 PM IST

Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

बेंगलूरु. भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था का प्रथम ऑफलाइन समारोह यशवंतपुर स्थित होटल में आयोजित किया गया जिसमें बनारस की वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी डॉ.मंजरी पाण्डेय के जीवन संघर्षों पर आधारित उपन्यास ‘काव्या’ का विमोचन किया गया।

इस मौके पर उपन्यास की नायिका मंजरी और लेखिका डॉ. इन्दु झुनझुनवाला के साथ संवाद शैली में काव्या पर विस्तृत चर्चा की गई।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.प्रेम तन्मय ने समीक्षा करते हुए कहा कि डॉ इन्दु ने इस कहानी को जिस शैली में लिखा है वो इतनी अद्भुत है कि पढऩे वाले की चेतना को जकड़ लेती है और पाठक अंत तक पढ़े बिना नहीं छोड़ पाता।
समारोह में विशिष्ट अतिथि की भूमिका में राजस्थान पत्रिका के सम्पादक प्रभारी जीवेन्द्र झा उपस्थित रहे,उन्होंने साहित्यकारों को शुभकामनाएं दीं।

प्रसिद्ध गजलकार और अभ्युदय के संरक्षक कमलकिशोर राजपूत ने उपन्यास की सराहना करते हुए एक गजल भी सुनाई।

अतिथि के रूप में डॉ सुचित्रा कॉल मिश्रा उपस्थित रहीं। साहित्यकार डॉ.सविता मागधी मिश्र ने कहा कि काव्या अनेक स्त्रियों की कहानी है, पर इतना साहस सभी में नहीं होता। लखनऊ की प्रसिद्ध लोकगायिका मधु श्रीवास्तव एवं दिल्ली की कवयित्री पुनीता सिंह भी उपस्थित थीं।

संचालक अंजना चाण्डक ने कहा कि यह कहानी जीवन के संघर्षों से जूझकर आगे बढ़ जाने की प्रेरणा देती है। डॉ उषा श्रीवास्तव, डॉ कविता शास्त्री, कुसुम चौधरी ने विचार व्यक्त किए।

उपन्यास की लोकप्रियता का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर डॉ. कविता शास्त्री इसका अनुवाद अंग्रेज़ी में कर रही हैं और डॉ.उमा शर्मा ने तेलुगू में इसका अनुवाद करने की अनुमति मांगी।
अंत में संस्थापक डॉ इन्दु झुनझुनवाला ने धन्यवाद दिया।

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