स्वयं का पता न होना ही पतन का कारण: डॉ. समकितमुनि

शूले स्थानक में चातुर्मास प्रवेश

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 02 Jul 2020, 07:05 PM IST

बेंगलूरु. डॉ. समकित मुनि आदि ठाणा तीन ने गणेश बाग से विहार कर चातुर्मास के लिए अशोकनगर (शूले) स्थानक में प्रवेश किया। विहार यात्रा कोरोना महामारी से संबंधित सरकारी नियमों का पालन करते हुए स्थानक पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई।

डॉ. समकितमुनि ने कहा कि समकित के संघ समकित की यात्रा का लक्ष्य स्वयं को जानना है। स्वयं के महत्व को जानने से जीवन का मूल्य बढ़ जाता है। जो स्वयं को जानने में अपनी जान नहीं लगाते वे स्वयं की जान के दुश्मन बन जाते हैं। स्वयं को न जानना , स्वयं का पता न होना ही हमारे पतन का कारण है। एक बार यदि पतन हो गया तो मानव का तन मिलना मुश्किल हो जाएगा। मानव जीवन का मुख्य लक्ष्य स्वयं को जानना ही है।

चातुर्मास में हमें अपने आप में खोना है

मुनि ने कहा कि इस चातुर्मास में हमें अपने आप में खोना है, जो अपने आप में नहीं खोते वे एक दिन स्वयं को खो देते हैं। हमें खुद को पाने में खोना है। निज को जानना ही बड़ी जरूरत है। निज को जानने के लिए हमें जिन का श्रवण करना होगा। जिसने जिन को जान लिया उसने निज को जान लिया।

मुनि ने कोरोना महामारी को देखते हुए चातुर्मास के दौरान प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए सतर्क व सुरक्षित रहते हुए धर्म आराधना करने को कहा। मुनि की प्रेरणा से जैन कॉन्फ्रेंन्स कर्नाटक की ओर से सवा लाख सामायिक महाकुंभ का आयोजन 4 जुलाई से होने जा रहा है।

इस अवसर पर शूले संघ के अध्यक्ष किरणराज मरलेचा, देवराज चोपड़ा, शांतिलाल चोपड़ा , महेंद्र मेहता, माणक लूणावत, प्रेमचंद कोठारी, इंद्रचंद भंसाली, महेंद्र चोपड़ा, सुदर्शन मांडोत उपस्थित थे। जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय मंत्री सुनील सांखला, प्रांतीय कार्याध्यक्ष आनंद कोठारी व अन्य उपस्थित थे।

Santosh kumar Pandey Desk
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