बेंगलूरु. इंतजार की घड़ी समाप्त हुई थी। 7 नवम्बर को दीपों का पर्व था। दीपावली पर आतिशबाजी का रिवाज दक्षिण के राज्यों में पिछले तीन-चार दशकों से अधिक हुआ है। उत्तर भारत की ही तरह अब यहां भी पटाखों का शोर बढ़ जाता है। बेंगलूरु में हर क्षेत्र में देर रात तक पटाखे फोड़े जाते रहे।

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