अब भाजपा को रिवर्स ऑपरेशन का भय

अब भाजपा को रिवर्स ऑपरेशन का भय

Ram Naresh Gautam | Updated: 02 Aug 2019, 06:06:06 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • इस संभावना को देखते हुए भाजपा हरेक कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है।

बेंगलूरु. राज्य विधानसभा में साधारण बहुमत के आधार पर सत्ता में आई भाजपा के सामने अब पहली चुनौती मंत्रिमंडल गठन की है। मंत्री पद पाने के लिए भाजपा में लंबी फेहरिस्त है।

ऐसे में अगर सभी की मुराद पूरी नहीं हुई तो जिस प्रकार पिछली सरकार के विधायक असंतुष्ट होकर बागी हो गए उसी तर्ज पर भाजपा को भी चुनौती झेलनी पड़ सकती है।

येडियूरप्पा सरकार के मंत्रिमंडल गठन के बाद भाजपा को डर है कि विपक्षी दल भी रिवर्स ऑपरेशन के जरिए मंत्री नहीं बनाए जाने से असंतुष्ट भाजपा विधायकों को तोडऩे का प्रयास कर सकती है।

इस संभावना को देखते हुए भाजपा हरेक कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है। पार्टी नेताओं को भय है कि मंत्रिमंडल के गठन में तनिक भी चूक होने की दशा में यदि 8 -10 विधायक रिवर्स ऑपरेशन के शिकार हो जाते हैं तो सरकार बचानी मुश्किल हो जाएगी।

इसी को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले पूरी एहतियात बरती जा रही है और पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने सभी राजनीतिक निर्णय केन्द्रीय स्तर पर ही लेने का निर्णय किया है।

मंत्रिमंडल गठन के मसले पर मुख्यमंत्री येडियूरप्पा अपने करीबी नेताओं के साथ निरंतर बैठकें करके संभावितों की सूची तैयार की है।

इस दौरान जातिवार, क्षेत्रवार, जिला वार व वरिष्ठता के आधार पर प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

भाजपा में ही मंत्री पद दावेदारों की भरमार है। इसके अलावा पार्टी के सामने बागी विधायकों को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की विवशता है।

सूत्रों के अनुसार भाजपा के केन्द्रीय नेताओं ने मुख्यमंत्री येडियूरप्पा को संभावितों की सूची लेकर 5 अगस्त के बाद दिल्ली पहुंचने को कहा है।

इस पर विस्तार से साथ चर्चा करके मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। सब कुछ सुचारु रूप से हुआ तो अगले सप्ताह गुरुवार या शुक्रवार तक मंत्रिमंडल गठन हो सकता है।


वरिष्ठ नेताओं का मिलेगा मौका
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पहले चरण में वरिष्ठ नेताओं की वरीयता दी जाएगी। इसमें जगदीश शेट्टर, के.एस. ईश्वरप्पा, आर. अशोक, गोविन्द कारजोल, बसवराज बोम्मई, बी. श्रीरामुलु, बालचन्द्र जारकीहोली, मुरुगेश निराणी, हरताल हालप्पा, सुरेश कुमार, रेणुकाचार्य और डा.अश्वथनारायण जबकि विधान परिषद से श्रीनिवास पुजारी, आयनूरु मंजुनाथ को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

भाजपा की नजर कांग्रेस व जद-एस के बागी विधायकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका के फैसले पर टिकी है।

जब तक इन विधायकों की याचिका पर फैसला नहीं हो जाता तब तक मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार नहीं किया जाएगा और उनको समायोजित करने के लिए कम से कम दस से अधिक मंत्री सीटें रिक्त रखी जा सकती हैं।

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