लोकायुक्त में लंबित मामलों की संख्या 7000 तक पहुंची

कर्नाटक लोकायुक्त के समक्ष लंबित मामलों की संख्या ७००० तक पहुंच चुकी है। यह स्थिति तब है जब राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों पर नकेल कसने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का भी गठन किया जा चुका है।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 10 Jan 2019, 06:23 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक लोकायुक्त के समक्ष लंबित मामलों की संख्या ७००० तक पहुंच चुकी है। यह स्थिति तब है जब राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों पर नकेल कसने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का भी गठन किया जा चुका है।

कर्नाटक लोकायुक्त जस्टिस विश्वनाथ शेट्टी का मानना है कि एसीबी के गठन के बाद भी लोकायुक्त कमजोर नहीं हुआ है। लेकिन, लोकायुक्त के सामने मुख्य चुनौती लंबित मामलों की संख्या को कम करना है जो वर्तमान में लगभग 7000 है।

नवम्बर २०१७ में भी शेट्टी ने लोकायुक्त के समक्ष लंबित मामलों को लेकर चिंता जताई थी। उस समय उन्होंने कहा था कि लोकायुक्त को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां हर दिन नए मामले दर्ज हो रहे हैं,े वहीं दूसरी ओर लंबित मामलों के निपटान की रफ्तार बेहद धीमी है।
मामलों के निपटान में विलंब का एक बड़ा कारण लोकायुक्त में पदो का रिक्त रहना भी है। रिक्तियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोकायुक्त में उप लोकायुक्त के दो पद है, लेकिन इस समय मात्र एक उप लोाकयुक्त ही सेवाएं दे रहे हैं। इसी प्रकार जांच प्रक्रिया में एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति कई महीनों तक नहीं होने से जांच ठहर जाती है।

श्रमशक्ति की कमी सबसे बड़ी चुनौती
लोकायुक्त के अनुसार श्रमशक्ति की कमी संस्थान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। वर्तमान में प्रत्येक न्यायिक अधिकारी एक महीने में केवल 50 पूछताछ करने में सक्षम है, जबकि 90 से 100 नए मामले लंबित रहते हैं जिन पर पूछताछ करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में देरी होती है, तो यह लोक सेवकों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, क्योंकि यदि वे निर्दोष हैं तो उनके सेवानिवृत्ति लाभ का निपटान तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उनके खिलाफ मामले लंबित न हों। उन्होंने कहा कि इसी तरह, अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो नागरिकों में एक मजबूत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि संस्था को मजबूत करने के लिए मौजूदा 11 के अलावा नौ जांच अधिकारियों की सख्त जरूरत है।
रिश्वत देकर काम न निकलवाएं

उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन में भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो इसके लिए आम नागरिकों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। उन्हें अपना हर सही-गलत काम रिश्वत के दम पर करवाना बंद करना चाहिए। रिश्वत देकर काम निकलवाने की प्रवृति नागरिकों को छोडऩी चाहिए और तय प्रावधानों के अनुरूप समयबद्ध सेवाएं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता पैदा करने के लिए लोकायुक्त ने 29 जिलों में बैठकें आयोजित की हैं।

Santosh kumar Pandey Desk
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